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लापरवाही : एमजीएम अस्पताल में मरीज को दी खराब दवा

लापरवाही : एमजीएम अस्पताल में मरीज को दी खराब दवा

एमजीएम अस्पताल में मरीजों का इलाज कम, उनकी जान से खिलवाड़ ज्यादा किया जा रहा है। ऐसा ही मामला शनिवार को सामने आया, जब एक युवक को डिस्पेंसरी से खराब दवा दे दी गई। लायलम, कपाली से गले में दर्द और कमजोरी का इलाज कराने पहुंचे संजय सरदार (21 वर्ष) ने मेडिसिन ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने पीसीएम (पैरासिटामॉल) और एमवीआई (एक्रोबिक एसिड) दवा लिखी। मरीज ने ओपीडी डिस्पेंसरी से दवा ली। पैकेट खोलने पर गाढ़े चित्तीदार भूरे रंग की दवा निकली। उन्होंने तुरंत एक दवा खा ली। पैकेट की दूसरी दवा खोलने पर देखा कि दवा का रंग गुलाबी था तो डॉक्टर को दवा दिखाई। डॉक्टर ने दवा देखने के बाद बताया कि यह दवा खराब हो चुकी है। मेडिकल पर्चे पर दवा का बदलने का निर्देश लिखकर दवा लेने का निर्देश दिया, लेकिन डिस्पेंसरी में उस दवा का पूरा स्टॉक खराब निकला। अंतत: मरीज को बाहर से दवा खरीदनी पड़ी। रख-रखाव के अभाव में खराब हो रहीं दवाएं : रखरखाव के अभाव में एमजीएम अस्पताल की अधिकांश दवाएं खराब हो रही हैं। कुछ दिनों पूर्व हिन्दुस्तान अखबार ने इस संबंध में खबर प्रकाशित कर अस्पताल प्रबंधन को चेताने का भी प्रयास किया था। एमजीएम में अधिकांश दवाएं खुले गलियारों पर रखी गई हैं। दरअसल दवाएं रखने के लिए एक भी आदर्श स्टोर रूम नहीं है। एकमात्र स्टोर रूम को कांफ्रेंस हॉल बना दिया गया है। इसके बदले तीन साधारण रूप को स्टोर रूम बनाया गया है। वहीं, दवाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए टेम्प्रेचर मैनेजमेंट (फ्रिज आदि) जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। जिस कारण दवाएं खराब हो रही हैं।

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