
ठंड से कोल्हान में 25 फीसदी तक घटा दूध उत्पादन
कोल्हान में कड़ाके की ठंड के कारण दूध का उत्पादन 20 फीसदी तक घट गया है। इससे ग्वालों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और उन्हें दुधारू पशुओं के खानपान पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। जिले में दूध की मांग बढ़ने के बावजूद उत्पादन में कमी के कारण दुकानों को दूध नहीं मिल पा रहा है।
कड़ाके की ठंड से कोल्हान में 20 फीसदी तक दूध का उत्पादन घट गया है। इसके कारण ग्वालों को न सिर्फ नुकसान हो रहा है, बल्कि दुधारू पशुओं के खानपान पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। जिले में करीब सवा लाख दुधारू पशु हैं। इनमें से कुछ प्रखंडों बहरागोड़ा, पटमदा आदि में ज्यादा पशुपालक हैं। ये सिर्फ जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि रांची स्थित डेयरी को भी दूध भेजते हैं। इसमें से ज्यादा लोग जमशेदपुर में ही दूध उपलब्ध कराते हैं। लेकिन फिलहाल दूध का उत्पादन घटने से वे लोग परेशान हैं। जिले में करीब पांच से छह लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा दूसरी जगहों पर भेजते हैं।
वहीं, दूसरा हिस्सा यहां स्थानीय डेयरी या लोगों को सीधे तौर पर दिया जाता है। मानगो के राजू यादव ने कहा कि उनके पास पांच गाय हैं, लेकिन दूघ घटने से सिर्फ रोज वाले ग्राहक को ही दूध दे पा रहे हैं। ग्वाला राजन यादव ने बताया कि वे गाय को गुड़, हल्दी, चोकर, सरसों की खल्ली खरीदकर खिला रहे हैं, ताकि दूध का उत्पादन एकदम कम न हो जाए, फिर भी उत्पादन 20 से 30 फीसदी तक घट गया है। इसके अलावा गाय-भैंस के लिए खटाल में लकड़ी में आग जलाकर रखना पड़ता है। वह एक अलग खर्च है। देखा जाए तो लागत बढ़ गई है और आय कम हो गई है। ग्राहकों को दूध कम मिलने के कारण कई लोग पैकेट वाला दूध भी खरीद रहे हैं। संक्रांति की तैयारी इन लोगों ने बताया कि मकर संक्रांति को लेकर दुकानों से भी काफी दूध की मांग है, लेकिन वे लोग वहां उतना दूध नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, नियमित ग्राहकों ने पहले से ही ज्यादा दूध की मांग की है। परेशानी यह है कि उत्पादन घटने पर किस-किस लोग को नाराज किया जाएगा। जिला पशुपालन पदाधिकारी समरजीत मंडल ने बताया कि पशु ठंड में पानी कम पीते हैं। वहीं, इनका खाना भी कम हो जाता है। इन सबका असर उनके दूध उत्पादन पर होता है।

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