
मरीजों से पर्ची खो भी जाएगी तो ऑनलाइन रहेगी सुरक्षित
एमजीएम अस्पताल ने मरीजों की पर्ची को डिजिटलाइज करने की प्रक्रिया शुरू की है। अब सभी रिकॉर्ड अस्पताल के पास रहेंगे, जिससे मरीज पर्ची खोने पर परेशान नहीं होंगे। ई-पर्ची में मरीजों की बीमारी का पूरा इतिहास दर्ज रहेगा। यह सुविधा दिसंबर तक अधिकतर मरीजों के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है।
एमजीएम अस्पताल में मरीजों की पर्ची अब भूल भी जाए तो बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका सारा रिकॉर्ड अस्पताल के पास रहेगा। यह व्यवस्था जल्द ही पूरी तरह शुरू कर दी जाएगी। एमजीएम अस्पताल को डिजिटलाइज करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसी क्रम में अब मरीजों की पर्ची भी डिजिटलाइज की जा रही है। इसके लिए विभिन्न विभागों में कंप्यूटर सेट दिए गए हैं। इसकी शुरुआत तो ईएनटी विभाग में की गई थी, लेकिन अब इसे दूसरे विभागों में भी शुरू कर दिया गया है। इसे पूरी तरह शुरू करने में कुछ समय और लगेगा।

मुख्यालय से सभी मेडिकल कॉलेजों में ई-पर्ची को जल्द पूरी तरह शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उम्मीद है कि दिसंबर तक अधिकतर मरीजों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा और प्रिंटेड पर्ची (प्रिसक्रिप्शन) दिए जाएंगे। सभी रिकार्ड रहेंगे दर्ज मरीजों को दिखाने के दौरान डॉक्टर जो भी जांच करेंगे और बीमारी की पहचान करेंगे तथा मरीज को जो भी सुझाव देंगे, उसे कंप्यूटर पर ही बनी ई-पर्ची पर टाइप करके लिखेंगे और फिर उसका प्रिंट निकालकर मरीज को देंगे। यह ई-पर्ची सिर्फ मरीज के पास ही नहीं रहेगी, बल्कि वह कंप्यूटर द्वारा अस्पताल के पोर्टल पर सेव हो जाएगी। यह क्लाउड में भी सेव हो जाएगी। जो मरीजों के आधार नंबर से जुड़ी होगी। हर बीमारी का रिकॉर्ड रहेगा दर्ज ई-पर्ची के माध्यम से मरीजों की हर बीमारी का रिकॉर्ड कंप्यूटर में दर्ज रहेगा। इससे मरीजों को दी गई पर्ची यदि भूल भी जाएगी तो अगली बार जब भी मरीज डॉक्टर के पास जाएंगे। डॉक्टर कंप्यूटर पर मरीज की बीमारी के इतिहास को देख सकेंगे और उसके अनुसार उसका इलाज कर सकेंगे और फिर नई प्रिंटेड पर्ची देंगे। एमजीएम अस्पताल में मरीजों की संख्या ज्यादा और कंप्यूटर कम होने के कारण अभी मरीजों को यह ई पर्ची नहीं मिल पा रही है। फार्मेसी में भी देख सकेंगे दवाई इस सुविधा में मरीजों को लिखी जाने वाली दवा की सभी जानकारी अस्पताल के फार्मेसी में भी दिखेगी, जिसके आधार पर मरीजों को कंप्यूटर में देखकर दवा दी जा सकेगी। यानी रजिस्ट्रेशन से लेकर दवाई मिलने तक सभी काम ऑनलाइन कर दिया जाएगा।

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