14 मई को शादी का आखिरी मुहूर्त, फिर एक महीने नहीं बजेगी शहनाई
इस साल 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिक मास के कारण शादी-ब्याह पर विराम रहेगा। पुरोहित संतोष त्रिपाठी के अनुसार, इस दौरान मांगलिक कार्यों की अनुमति नहीं होगी। मलमास के बाद 21 जून से 12 जुलाई के बीच 13 शुभ मुहूर्त मिलेंगे। 18 जुलाई से देवगुरु बृहस्पति अस्त हो जाएंगे, जिससे विवाह का योग समाप्त हो जाएगा।

इस साल 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिक मास के कारण भी शादी-ब्याह पर विराम रहेगा। यह अधिक मास पूरे ज्येष्ठ को 59 दिन का बना देगा। अधिक मास में शुभ मुहूर्त नहीं होते। पुरोहित संतोष त्रिपाठी ने बताया कि पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मलमास की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और यह 15 जून 2026 तक रहेगा। इस पूरे समय को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा। लगभग एक महीने तक चलने वाला यह काल मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है, इसलिए इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ काम नहीं किए जाते। अनुष्ठान के लिए विशेष माना जाता है यह महीना
मलमास के कारण वर्ष 2026
पुरोहित संतोष त्रिपाठी ने बताया कि इस बार मलमास के कारण साल 2026, 13 माह का हो रहा है। पंचांग के अनुसार, यह मलमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यवसाय की शुरुआत पर रोक रहेगी। मलमास के कारण वर्ष 2026 में 13 महीने होंगे। मलमास में मांगलिक कार्य नहीं होते। इस दौरान किए गए पूजा-पाठ का विशेष लाभ मिलता है। खास कर भगवान विष्णु और भोलेनाथ की पूजा करनी चाहिए। अधिक मास में रामायण, गीता आदि धार्मिक ग्रंथों का दान करना भी शुभ होता है。
शुभ मुहूर्त
21 जून से 12 जुलाई के बीच 13 शुभ मुहूर्त मिलेंगे। 21 जून से 12 जुलाई के बीच ये 13 तिथियां होंगी। जून में 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 और जुलाई में 1, 6, 7, 11, 12 को मंगल तिथि है।
देवगुरु बृहस्पति का अस्त
11 जुलाई तक शादी विवाह के मुहूर्त हैं। इसके बाद 18 जुलाई से देवगुरु बृहस्पति अस्त हो जाएंगे। शादी विवाह में देवगुरु बृहस्पति और दैत्यों के गुरु शुक्र उदय स्थिति में रहते हैं, तभी विवाह के योग बनते हैं, लेकिन इस बार 18 जुलाई से बृहस्पति अस्त रहेंगे। ऐसे में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इसके एक सप्ताह बाद 25 जुलाई को देवशयन हो जाएगा। साथ ही कुछ समय बाद शुक्र तारा भी अस्त हो जाएगा, जिससे विवाह योग समाप्त हो जाएंगे। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी से शादी का शुभ मुहूर्त शुरू होगा。
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