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नदियों से निकलने वाले बालू का विकल्प बनेगा एम सैंड

नदियों से निकलने वाले बालू का बेहिसाब खनन बहुत जल्द इसे दुर्लभ सामग्री बना देगा। पर्यावरणविदों ने नदियों में बालू समाप्त होने को लेकर रेड फ्लैग का...

नदियों से निकलने वाले बालू का विकल्प बनेगा एम सैंड
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हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरSat, 22 Jun 2024 05:31 PM
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नदियों से निकलने वाले बालू का बेहिसाब खनन बहुत जल्द इसे दुर्लभ सामग्री बना देगा। पर्यावरणविदों ने नदियों में बालू समाप्त होने को लेकर रेड फ्लैग का इशारा कर दिया है। इस कारण अब भविष्य में भवन निर्माण के लिए कंक्रीट तैयार करने के लिए बालू की उपलब्धता मुश्किल हो जाएगी। ऐसे में अब प्राकृतिक नदी के बालू का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया गया है। मैनुफैक्चर्ड सैंड (एम सैंड) को प्राकृतिक बालू के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है।
मैनुफैक्चर्ड सैंड को ग्रेनाइट पत्थर के चूर्ण से बनाया जाता है। भविष्य में जब पर्यावरणीय कारणों से नदी से बालू का खनन पूरी तरह से रोक दिया जाएगा तो कंक्रीट तैयार करने में एम-सैंड को इस्तेमाल में लाया जाएगा। हालांकि यह विकल्प प्राकृतिक बालू से काफी महंगा होगा, लेकिन बालू की उपलब्धता नहीं होने पर विकल्प के रूप में इससे भवन निर्माण का काम बाधित नहीं होगा। एनआईटी जमशेदपुर के सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों ने इस वैकल्पिक बालू, यानी मैनुफैक्चर्ड बालू की मजबूती को लेकर एक रिसर्च किया है, जिसमें वर्तमान में प्राकृतिक बालू व सीमेंट के मिश्रण से बनने वाले कंक्रीट की मजबूती की तुलना नए एम सैंड व सीमेंट के मिश्रण से बने कंक्रीट का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। एनआईटी में 2016 बैच के छात्र रहे प्रदीप मेहता, अमरेंद्र सिंह व राकेश कुमार के मुताबिक दोनों कंक्रीट के तुलनात्मक अध्ययन में एम-सैंड वाला कंक्रीट ज्यादा मजबूत साबित हुआ। इस अध्ययन में दोनों कंक्रीट पर सलफेट के असर का अध्ययन किया गया। उनके मुताबिक किसी भी कंक्रीट को वातावरण में उपस्थित सलफेट सॉल्ट का सामना करना पड़ता है। यह सलफेट जमीन की नमी से, भूगर्भ जल से और समुद्री वायु से कंक्रीट को प्राप्त होता है। इसमें सल्फ्यूरिक एसिड की मात्रा होती है, जो कंक्रीट को नुकसान पहुंचाता है। शोधार्थियों की चिंता इसी सल्फ्यूरिक एसिड को झेल पाने की क्षमता को लेकर थी। अध्ययन में दोनों कंक्रीट को सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, अमोनियम सलफेट को द्रव्य में डुबोकर देखा गया। रिसर्च में पाया गया कि प्राकृतिक नदी वाले बालू से बने कंक्रीट के मुकाबले एम सैंड वाला बालू ज्यादा मजबूती से सभी द्रव्यों को झेलने की क्षमता रखता है। इसपर यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह मैनुफैक्चर्ड सैंड भविष्य में नदी के बालू का बेहतर विकल्प बनने की क्षमता रखता है।

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