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21 जनवरी, 2021|1:13|IST

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जुआ की शक्ल ले चुका है लॉटरी का चस्का

जुआ की शक्ल ले चुका है लॉटरी का चस्का

झारखंड में प्रतिबंध के बावजूद लॉटरी का धंधा फल-फूल रहा है। दीपावली के मद्देनजर लॉटरी की खूब बिक्री हो रही है। लॉटरी विक्रेता एक करोड़ और 10 करोड़ का बंपर इनाम जैसा लालच दिखाकर पांच सौ से एक हजार तक के मूल्य वाले टिकट बेच रहे हैं। 10 रुपये की लॉटरी खरीदकर मालामाल बनने का ख्वाब संजोये लोग हर दिन अपनी जेब खाली करते रहते हैं। खदानों में काम करने वाले श्रमिक, कल कारखानों में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर, कॉलेज के विद्यार्थी, रेलकर्मी से लेकर वाहन चालक तक इसकी चपेट में हैं। कोल्हान में लॉटरी का चस्का जुआ की शक्ल ले चुका है। पड़ोसी राज्यों ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के अलावे सिक्किम, मेघालय, मणिपुर, नगालैंड और मिजोरम की लॉटरी भी बिक रही है।पहले पश्चिम बंगाल से आने वाले सामाचार पत्रों में इसका प्रतिदिन परिणाम होता था लेकिन अब इसे ऑनलाइन कर दिया गया है। ऑनलाइन परिणाम दांव लगाने वालों को लॉटरीबाज दिखाता है।कोरोनाकाल में भी बंद नहीं हुआ धंधा :कोरोनाकाल और लॉकडाउन के बावजूद लॉटरी की बिक्री बंद नहीं हुई। विक्रेताओं ने टिकट बिक्री के लिए स्टॉल लगाना तो बंद कर दिया पर एजेंट घूम-घूम कर लॉटरी बेच रहे हैं। इतना ही नहीं, निर्धारित स्थल पर खड़े रहते हैं और लॉटरी खेलने वाले आकर उनसे टिकट की खरीदारी करते हैं। चक्रधरपुर, चाईबासा आदि में संवाद, धन केसरी, सिक्किम लॉटरी, नागालैंड लॉटरी, सिगमा लॉटरी सहित कई लॉटरी के टिकट अधिक बिक रहे। एक लॉटरी के टिकट की कीमत 10 से 250 सौ रुपये तक है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन पश्चिमी सिंहभूम जिले में 15-20 लाख रुपये और पूर्वी सिंहभूम में 25 से 30 लाख रुपये की लॉटरी बिकती है। पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड में ही अकेले प्रतिदिन पांच लाख रुपये की लॉटरी का कारोबार होता है। यहां पश्चिम बंगाल के सिंघम, धनकेशरी, डाटाकिंग और डियर नामक लॉटरी टिकटों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। इसकी लत में अनेक परिवार बरबाद हो चुके हैं। श्रमिक अपनी कमाई लॉटरी टिकट खरीदने में बर्बाद कर रहे हैं।

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  • Web Title:Lottery has taken the form of gambling