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2 दिसंबर, 2020|12:17|IST

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भगवान विश्वकर्मा की आज पूजा करेगा शहर

भगवान विश्वकर्मा की आज पूजा करेगा शहर

शहर में सोमवार को भगवान विश्वकर्मा की पूजा धूमधाम से होगी। रविवार को बाजार में पूजा सामग्री खरीदने और प्रतिमाओं को ले जाने के लिए काफी भीड़ रही। वहीं, मिठाइयों की दुकानों पर भी भीड़ रही। ऑर्डर देने व मिठाइयां ले जाने वाले पहुंचते रहे।

सनातन धर्म के अनुसार, विधाता ब्रह्मा जी को जब संपूर्ण संसार की रचना की इच्छा हुई तो कल्पना को साकार रूप देने के लिए उन्होंने विश्वकर्मा का रूप धारण किया। संसार के निर्माता का रूप लेकर इंजीनियर बन गए। स्वर्ग की रचना और लंका की रचना करने वाले भगवान विश्वकर्मा द्वारिका पुरी गए व दरिद्र सुदामा के जीवन का कायाकल्प किया।

पूजा कैसे करें : ज्योतिषाचार्य पंडित सुधानंद झा ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा वैसे ही करनी चाहिए, जैसे भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा की पूजा करते हैं। भगवान विश्वकर्मा में तीनों देवों की शक्ति है। संसार की जब रचना करते हैं तो वे ब्रह्मा जी होते हैं और जब उनको आयु (स्थिरता) प्रदान करते हैं तो विष्णु के रूप होते हैं। रचना की खराबी को हटाते हैं तो शिव का रूप धारण करते हैं।

सुन्दर माला लेकर जाएं : भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने जाएं तो सुंदर माला जरूर लेकर जाएं। चढ़ावा के रूप में फूल, अगरबत्ती, चंदन, कारीगरी का सामान, कल पुर्जा, चौमुखी दीया, पीली धोती, पीला गमछा, मुकुट ले जाएं। भगवान विश्वकर्मा की सवारी हाथी है। इसलिए हाथी की भी पूजा होती है। पुरुष हाथी को माला अर्पण करनी चाहिए। लाल कपड़े का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

पांच प्रकार के फल-मिठाई चढ़ाएं : भगवान विश्वकर्मा की पूजा में पांच प्रकार के फल, मिठाई और पंचामृत चढ़ाने का विशेष लाभ मिलता है। सेब, केला, नारंगी, अनार आदि जैसे फल गोटा और बड़ा दाना वाली सुपारी चढ़ानी चहिए। भगवान को पुस्तक और कलम भी समर्पित करना चाहिए। पंचामृत में गाय का दूध, गाय का घी, दही, मधु और चीनी तथा पांच प्रकार की मिठाइयां भेंट करनी चाहिए।

आरती का महत्व : भगवान विश्वकर्मा की आरती का बड़ा महत्व है। घी की आरती करनी चाहिए। चौमुखी दीया जलाना चाहिए, ताकि चारों ओर से सफलता नसीब हो।

मजदूर को तोहफा दें : ज्योतिषाचार्य ने बताया कि विश्वकर्मा पूजा के दिन यदि कोई मजदूर काम कर रहा हो तो उसे तोहफा जरूर देना चाहिए। सवेरे जगना चाहिए। वाहन, कल पुर्जे और मशीनों की पूजा के बाद उसपर स्वास्तिक चिह्न जरूर बनाना चाहिए।

कन्या राशि में होते हैं सूर्य : विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को ही इसलिए की जाती है कि इस दिन सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि हर पर्व-त्योहार की तिथि बदलती है, लेकिन विश्वकर्मा पूजा इसी दिन होता है, क्योंकि अबतक सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश इसी दिन होता आ रहा है। इसी दिन विधाता विश्वकर्मा का रूप धारण करते हैं।

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  • Web Title:Lord Vishwakarma will worship today