
बिना शौचालय स्कूलों में छात्राओं के लिए 5-6 घंटे बिताना मुश्किल
जिले के सरकारी स्कूलों में छात्राओं को शौचालय और पानी की उचित व्यवस्था की कमी से स्वास्थ्य और मानसिकता पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि शौचालय न होने के कारण छात्राएं डर और संक्रमण का शिकार होती हैं। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर ध्यान देने की जरूरत है।
जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों खासकर छात्राओं को रोज पांच से छह घंटे बिताना पड़ता है। ऐसे में अगर शौचालय और पानी की उचित व्यवस्था न हो तो सेहत पर असर पड़ना लाजिमी है। ऐसे स्कूलों की स्थिति पर अभिभावकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि शौचालय नहीं होने पर छात्राओं के लिए हमेशा डर बना रहता है। संक्रमण के साथ ही छेड़छाड़ की भी डर रहता है। सरकारी स्कूलों के आसपास सामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। ऐसे में छात्राएं कई बार शौचालय का प्रयोग करने से बचती हैं। ज्यादा देर तक यूरिन रोकने से छात्राओं को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भी झेलनी पड़ती है।
पीरियड्स के दौरान पैड बदलने में समस्याएं होती हैं। स्कूल प्रबंधन और सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही सभी स्कूलों में सिर्फ शौचालय ही नहीं पानी की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। शौचालय नहीं होने से छात्राओं के शारीरिक समेत मानसिक सेहत पर भी प्रभाव पड़ता है। बेंच-डेस्क भले न हो, लेकिन शौचालय जरूर हो सरकारी स्कूलों में पढ़ रही छात्राओं की मांओं ने कहा कि स्कूल में भले ही बेंच-डेस्क की कमी हो, विद्यार्थी नीचे बैठकर पढ़ लेंगे, लेकिन शौचालय की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए। न तो स्कूल प्रबंधन और न ही सरकार इसे प्राथमिकता में रखती हैं। मॉडल स्कूल और उत्कृष्ट विद्यालय के नाम पर बड़े-बड़े बिल्डिंग तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन जो बुनियादी सुविधा है और जो सबसे ज्यादा जरूरी है शौचालय उसे पर ध्यान नहीं दिया जाता। ---- स्कूलों में शौचालय नहीं होने से छात्राओं के स्वास्थ्य पर ही नहीं दिमाग पर भी कई बुरा प्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं। - पार्वती दास स्कूल में छात्राओं के लिए अलग से टॉयलेट की व्यवस्था होनी चाहिए। ज्यादातर स्कूलों में छात्र और छात्राओं का टॉयलेट अगल-बगल ही होता है, लेकिन इसमें थोड़ी दूरी बनानी चाहिए। - रूमा दे स्कूली बच्चों और छात्राओं के साथ हर दिन कुछ न कुछ घटनाएं घट रही हैं। ऐसे में शौचालय नहीं होने पर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ हो सकती है। स्कूल में छात्राओं के लिए अलग से टॉयलेट की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए। - गीता रानी गोराई विद्यार्थी स्कूल में पढ़ाई करने आते हैं, लेकिन स्कूल में शौचालय नहीं होने से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है। भयमुक्त होकर स्कूलों में छात्राएं पढ़ाई करें, इसके लिए शौचालय बनना चाहिए। -रेखा कुंभकर छात्राओं की सुरक्षा स्कूल की जिम्मेदारी है। स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है, वहां पर शौचालय बनवाना चाहिए, ताकि लड़कियों को शौच आदि के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। - मोहम्मद महमूद शौचालय नहीं होने के कारण छात्राएं मानसिक रूप से परेशान रहती हैं। आएं दिन छात्राओं के साथ छेड़खानी जैसी बात आम है। छोटी छोटी बच्चियों के साथ भी ऐसी घटनाएं घट रही है इस पर सरकार और स्कूल प्रबंधन को ध्यान देना चाहिए। अश्विनी सिंह

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