सरायकेला जेल से जुड़े हो सकते हैं कैरव गांधी के अपहरण के तार
शहर के कारोबारी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण की जांच में पुलिस हर पहलू को खंगाल रही है। पुलिस को शक है कि इस घटना का संबंध सरायकेला जेल से हो सकता है। अपहरणकर्ताओं ने वाहन बदलकर पुलिस को गुमराह किया। साइबर एक्सपर्ट की मदद से कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रैक की जा रही है।

शहर के कारोबारी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण की जांच में पुलिस हर कड़ी को खंगाल रही है। पुलिस को आशंका है कि इस वारदात के तार सरायकेला जेल से जुड़े हो सकते हैं। जेल में बंद कई अपराधियों का बिहार और उत्तर प्रदेश के कुख्यात बदमाशों से संपर्क बताया जा रहा है। इस कड़ी में पुलिस की टीम अब झारखंड के अलावा बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल तक दबिश देने की तैयारी में है। जमशेदपुर से बिहार तक जाने के दौरान पांच से अधिक गाड़ियां बदलीं सूत्रों के मुताबिक, अपहरणकर्ताओं ने जमशेदपुर से बिहार तक जाने के दौरान पांच से अधिक गाड़ियां बदलीं, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।
लगातार वाहन बदलने से यह साफ हो रहा है कि वारदात को पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर रूट मैप तैयार कर हर संभावित ठिकाने पर जा रही है। साइबर एक्सपर्ट की मदद ली जा रही कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रैक करने के लिए साइबर एक्सपर्ट की मदद ली जा रही है। पुलिस टीम मोबाइल टावर डंप, व्हाट्सएप कॉल, इंटरनेट कॉल और संदिग्ध नंबरों की गतिविधियों को खंगाल रही है। जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे इनपुट भी मिले हैं, जिनसे जेल के अंदर से नेटवर्क संचालित होने की आशंका मजबूत हुई है। जेल रिकॉर्ड, मुलाकात रजिस्टर की जांच बताया जा रहा है कि सरायकेला जेल में बंद कई अपराधियों के बाहर के गिरोहों से पुराने संबंध हैं। यही वजह है कि पुलिस जेल रिकॉर्ड, मुलाकात रजिस्टर और हाल के कॉल लॉग भी खंगाल रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं जेल में बंद अपराधियों ने ही बाहर के बदमाशों को निर्देश तो नहीं दिए। चंदन सोनार बंद रहा था सरायकेला की जेल में सितंबर 2006 की रात जमशेदपुर के जाने-माने उद्योगपति कृष्णा भालोटिया का अपहरण कर लिया गया था। उस वक्त यह कांड दिलीप सिंह गिरोह ने अंजाम दिया था। उस समय गिरोह के सदस्य चंदन सोनार और सुमन सिंह को गिरफ्तार किया था। चंदन सोनार को सरायकेला जेल में रखा गया था, जहां रहने के दौरान उसका कई अपराधियों से संपर्क बना था। पुलिस का मानना है कि उसी तर्ज पर कैरव गांधी अपहरण में भी जेल नेटवर्क और अंतरराज्यीय गिरोह की भूमिका हो सकती है। फिलहाल कई बिंदुओं पर एक साथ जांच चल रही है और पुलिस को जल्द अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
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