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जमशेदपुरसरकारी स्कूलों में ऑनलाइन क्लास के नाम पर खानापूरी

हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:10 AM
सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन क्लास के नाम पर खानापूरी

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच स्कूल बंद हैं और ऑनलाइन ही पढ़ाई का जरिया है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति सरकारी स्कूलों की है। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को संसाधन नहीं होने से इसका फायदा नहीं मिल रहा है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 70 प्रतिशत छात्र निम्न वर्गीय परिवार से हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि वे अपने बच्चों को ऑनलाइन क्लास के लिए एक स्मार्टफोन या लैपटॉप खरीद कर दे सके। पढ़ाई से वंचित छात्रों का कहना है कि सरकार उन्हें स्मार्टफोन मुहैया कराए। ताकि वे अपना पढ़ाई जारी रख सके। स्मार्टफोन के साथ सिम उपलब्ध कराएं। छात्रों का कहना है कि इस बार उन्हें साइकिल नहीं, स्मार्टफोन मिले। स्कूल पिछले वर्ष से ही बंद है ऐसे में साइकिल की उन्हें जरूरत नहीं रह गई है। राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आठवीं के छात्रों को हर वर्ष साइकिल योजना के तहत 35 सौ रुपये साइकिल खरीदने के लिए देती है।

ऑनलाइन के जरिये बेहतर शिक्षा देने का प्रयास विभाग के साथ शिक्षक भी कर रहे हैं। बाकी जो ऑनलाइन नहीं जुड़ पाए हैं उन्हें किताबें दी गई हैं। प्राथमिक व मध्य विद्यालय के ज्यादातर विद्यार्थियों को किताबें मिल चुकी है। बाकी छात्रों तक किताबें पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

-सच्चिदानंद तिग्गा, डीईओ, पूर्वी सिंहभूम

कोट:

स्मार्टफोन नहीं होने के कारण पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं। मेरे बड़े पापा के पास फोन हैं। कभी-कभार फोन लेकर ऑनलाइन क्लास करती हूं। अभी वह गांव चले गए हैं, जिस कारण पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं।

-सोनाली, मिडिल स्कूल नीलडीह

सरकार अगर ज्यादा संख्या में किसी कंपनी से स्मार्टफोन खरीदती है तो सस्ते में उपलब्ध हो जाएगा। सिर्फ ऑनलाइन क्लास ही नहीं विद्यार्थियों को टेक्निकल फ्रेंडली भी होना आवश्यक है। वरना परेशानी होगी।

-राहुल सरकार, मिडिल स्कूल हुरलुंग

पिछले साल से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई थी। इस कारण क्लास नहीं कर पा रहा हूं। इस साल भी स्कूल खुलने के कम चांस हैं। ऐसे में छात्रों को फोन उपलब्ध कराने के बाद ही ऑनलाइन क्लास लेनी चाहिए।

-प्रदीप, मध्य विद्यालय डिमना

हम लोग तीन भाई-बहन हैं। सभी सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। बड़ी बहन कक्षा नौ में हैं। उन्हें अब तक साइकिल नहीं मिल पाई है। साइकिल की जगह स्मार्टफोन मिलता तो अच्छा होता। अभी सेल्फ स्टडी कर रही हूं।

-जयंती, मध्य विद्यालय हुरलुंग

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