Jamshedpur News: केरल का सबसे बड़ा त्योहार ओणम रविवार को केरला समाजम परिसर, गोलमुरी में धूमधाम से मनाया गया। उत्सव की शुरुआत समिति के सदस्यों की ओर से सजाए गए भव्य पूकलम से हुई।
Jamshedpur News: केरल का सबसे बड़ा त्योहार ओणम रविवार को धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में पूकलम, कैकोट्टिकली, और पुलिकली जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के साथ-साथ पारंपरिक ओणम साध्या का आनंद लिया गया, जिसमें 16-17 प्रकार के व्यंजन परोसे गए। महाबली का स्वागत करने के लिए कलाकारों ने प्रदर्शन किए और सबने मिलकर उत्सव का जश्न मनाया।

Jamshedpur News: केरल का सबसे बड़ा त्योहार ओणम रविवार को केरला समाजम परिसर, गोलमुरी में धूमधाम से मनाया गया। उत्सव की शुरुआत समिति के सदस्यों की ओर से सजाए गए भव्य पूकलम से हुई। इसके बाद पूकलम मत्सरम (फूलों की रंगोली प्रतियोगिता) का आयोजन किया गया। उत्सव का मुख्य आकर्षण राजा महाबली का प्रतीकात्मक स्वागत रहा। महाबली की वेशभूषा में सजे कलाकार को देखकर लोग सेल्फी और फोटो लेने के लिए उमड़ पड़े। कार्यक्रम में बच्चों से लेकर बड़ों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सांस्कृतिक मंच पर महिला सदस्यों ने कैकोट्टिकली (तिरुवातिरा नृत्य) की आकर्षक प्रस्तुति दी। ओणम के गीतों के साथ अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। पुलिकली (बाघ नृत्य) ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं, केरल से विशेष रूप से मंगाए गए चेंदा मेलम की गूंजती धुनों ने माहौल को और जीवंत कर दिया。
केरल की संस्कृति की दिखी झलक
ओणम के अवसर पर समाज के लोग पारंपरिक परिधान पहनकर पहुंचे। केरला समाजम परिसर में केरल की संस्कृति की झलक देखने को मिली। महिलाओं ने फूलों की रंगोली बनाकर महाबली का स्वागत किया। महाबली की वेशभूषा में कलाकार भीड़ के बीच पहुंचे और लोगों को आशीर्वाद दिया। समाजम के पुरुष सदस्यों ने वांची पट्टू (नाव गीत) गाकर महाबली का स्वागत किया। परिसर में कई सेल्फी कॉर्नर भी बनाए गए थे। यहां बच्चे, युवा और महिलाएं समेत पूरे परिवार के साथ लोग फोटो खिंचवाते नजर आए। पूकलम मत्सरम में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने अलग-अलग रंगों और फूलों से आकर्षक रंगोली बनाकर अपनी रचनात्मकता दिखाई। समाजम के सदस्यों की ओर से तैयार किया गया बड़ा पूकलम भी आकर्षण का केंद्र रहा। मान्यता है कि ओणम पर फूलों की रंगोली राजा महाबली के स्वागत के लिए बनाई जाती है। कहा जाता है कि साल में एक बार राजा महाबली पाताल लोक से धरती पर अपनी प्रजा का हाल जानने आते हैं। इसी मान्यता के साथ ओणम का उत्सव मनाया जाता है।
खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जमकर हुई मस्ती
उत्सव के दौरान खेलकूद और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें बच्चों से लेकर बड़ों तक ने उत्साह से हिस्सा लिया। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। कलाकारों ने मलयाली और हिंदी गीतों की प्रस्तुति दी। महिला सदस्यों की कैकोट्टिकली की लयबद्ध प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। प्रतियोगिताओं और खेलों के दौरान पूरे परिसर में हंसी-खुशी और जयकारे गूंजते रहे। लोगों ने देर शाम तक कार्यक्रमों का आनंद लिया।
अतिथियों और सदस्यों के लिए ओणम साध्या का आयोजन
केरला समाजम के सदस्यों और अतिथियों ने पारंपरिक ओणम साध्या का आनंद लिया। केले के पत्ते पर चावल, सांभर, रसम, ओलन, छाछ, केले के चिप्स, पापड़ और खीर समेत 16-17 तरह के पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। लोगों ने पारंपरिक भोजन का भरपूर आनंद लिया। आयोजन में समाजम के 1000 से अधिक सदस्यों ने हिस्सा लिया।


