
केरल कैथोलिक एसोसिएशन ने दिया प्रभु यीशु के आगमन का संदेश
केरल कैथोलिक एसोसिएशन ने चार दिनों तक घर-घर जाकर मलयालम कैरोल गाए। 20 से अधिक गायकों ने प्रभु यीशु के आगमन का संदेश दिया। सभी सदस्यों ने सांता क्लॉज की पोशाक पहनकर नृत्य किया। इस अवसर पर क्रिसमस के महत्व पर भी चर्चा की गई, जिसमें प्रेम और करुणा के मूल्यों को उजागर किया गया।
केरल कैथोलिक एसोसिएशन की ओर से चार दिनों तक घर-घर जाकर मलयालम कैरोल गीत गाए गए। 20 से अधिक गायकों ने ढोल और तुरही के साथ विभिन्न घरों में पहुंचकर गीतों के माध्यम से प्रभु यीशु के आगमन का संदेश दिया। इस दौरान सभी सदस्य सांता क्लॉज की पोशाक और टोपी पहने हुए नजर आए तथा नृत्य करते हुए शिशु यीशु मसीह के आगमन से जुड़े गीत प्रस्तुत किए। संस्था के अध्यक्ष जीजू थॉमस और सचिव जॉली मैथ्यू ने कैरोल सिंगिंग में भाग लेने वाले सभी सदस्यों को बधाई दी और कड़ाके की ठंड के बावजूद घर-घर जाकर प्रभु यीशु के संदेश को फैलाने के उनके प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर क्रिसमस के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि क्रिसमस यीशु मसीह के जन्म का पर्व है, जो प्रेम, करुणा और जीवन के मूल्यों का प्रतीक है। उनका जन्म ऐसी दुनिया में हुआ, जहां लालच, नफरत, बदला और पाखंड हावी था, लेकिन उन्होंने प्रेम और आपसी सद्भाव का मार्ग दिखाया। उन्होंने सिखाया कि जो कुछ हमारे पास है, उसके लिए आभारी रहकर ही दुनिया में शांति लाई जा सकती है।

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