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टाटा स्टील फाउंडेशन की काम्या ने किया एवरेस्ट फतह, लहराया तिरंगा

टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन(टीएसएफए) की पर्वतारोही 16 साल की काम्या कार्तिकेयन ने एवरेस्ट फतह कर कीर्तिमान बनाया...

टाटा स्टील फाउंडेशन की काम्या ने किया एवरेस्ट फतह, लहराया तिरंगा
हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरTue, 21 May 2024 06:15 PM
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टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन(टीएसएफए) की पर्वतारोही 16 साल की काम्या कार्तिकेयन ने एवरेस्ट फतह कर कीर्तिमान बनाया है। काम्या ने सोमवार को दोपहर 12.35 बजे एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराया। इसके बाद उन्होंने टाटा स्टील का भी झंडा फहराया। इस अभियान(समिट) में काम्या के पिता एस कार्तिकेयन भी शामिल थे। दोनों पिता-पुत्री शाम 4.10 बजे तक बेस कैंप-4 में लौट आये। काम्या मूलरूप से मुंबई की रहने वाली काम्या पिछले डेढ़ साल से फाउंडेशन से जुड़ी हुई हैं।
काम्या पिता के साथ रविवार देर रात फाइनल अभियान के लिए बेस कैंप-4 से निकली थी। रविवार को ही दोनों बेस कैंप-4 पहुंच गए थे। इनका अभियान 6 अप्रैल को काठमांडू से शुरू हुआ था। माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने के लिए 7 सप्ताह का अभियान था।

बेस कैंप-4 से शुरू होती है एवरेस्ट की अंतिम चढ़ाई

करीब डेढ़ महीने के अभियान में कई तरह के मौसम से पर्वतारोही को पार पाना होता है। उच्च शिविरों में कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचने के लिए जो रास्ता है, उसमें बेस कैंप के बाद 4 कैंप हैं। बेस कैंप-4 से ही अंतिम चढ़ाई शुरू होती है।

शिखर तक पहुंचने में मौसम की होती है अहम भूमिका

शिखर पर पहुंचने में मौसम की बहुत बड़ी भूमिका होती है। मौसम खराब होने पर पर्वतारोहियों को बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसी साल रामगढ़ जिले के भुरकुंडा बाजार के युवा व्यापारी शाहबाज आलम ने एवरेस्ट बेस कैंप की सफल चढ़ाई की थी। वे मस्जिद कॉलोनी के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम सलाउद्दीन मंसूरी है। उन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए एक महीने की ट्रेनिंग की थी। शाहबाज ने कहा कि बेस कैंप पहुंचकर देश का तिरंगा लहराना गौरवान्वित करने वाला क्षण था।

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