आयरन और कॉपर के बाद कोल्हान बन सकता ‘टेक- मिनरल हब’
झारखंड का कोल्हान प्रमंडल आने वाले समय में देश का 'टेक-मिनरल हब' बन सकता है। परमाणु खनिज निदेशालय और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अन्वेषणों से पता चला है कि यहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स का विशाल भंडार है। यूरेनियम और अन्य दुर्लभ खनिजों की खोज से कोल्हान की वैश्विक पहचान बदल सकती है।

झारखंड का कोल्हान प्रमंडल आने वाले समय में देश के ''टेक-मिनरल हब'' बन सकता है। परमाणु खनिज निदेशालय (एएमडी) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के नवीनतम अन्वेषणों में यह तथ्य सामने आई है कि कोल्हान की धरती में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों यानी रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) का विशाल भंडार छिपा हुआ है। राज्यसभा में हाल ही में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार झारखंड सहित देश के संभावित भौगोलिक क्षेत्रों में यूरेनियम और आरईई की खोज के लिए एकीकृत और बहु-विषयक अभियान चला रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोल्हान का प्रसिद्ध 'सिंहभूम शीयर ज़ोन' न केवल यूरेनियम और तांबे के लिए समृद्ध है, बल्कि यहां उच्च क्षमता वाले दुर्लभ खनिजों के मिलने के प्रबल संकेत मिले हैं।
एएमडी के अनुमानों के मुताबिक, कोल्हान के अंतर्देशीय जलोढ़ क्षेत्रों (इनलैंड एल्यूवियम) में भारी मात्रा में मोनाजाइट मिलने के आसार हैं, जो आरईई और थोरियम का मुख्य स्रोत है। वर्तमान में देश में लगभग 7.23 मिलियन टन कुल दुर्लभ पृथ्वी ऑक्साइड के भंडार का अनुमान है, जिसमें झारखंड की हिस्सेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इनका उपयोग स्मार्टफोन, रक्षा उपकरण, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बनाने में प्रमुखता से होता है।जीएसआई ने वर्ष 2025-26 के दौरान आरईई के लिए 92 विशेष परियोजनाओं को शुरू किया है। साथ ही, खान मंत्रालय ने कई महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी भी सफलतापूर्वक पूरी की है। वर्तमान में झारखंड में यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) पहले से ही सात खदानों और दो प्रसंस्करण संयंत्रों का संचालन कर रहा है। अब आरईई के भंडार मिलने की पुष्टि होने से न केवल कोल्हान की वैश्विक पहचान बदलेगी।दुर्लभ पृथ्वी तत्व की खोज को हो रहा अन्वेषणपूर्वी सिंहभूम का भू-गर्भीय ढांचा 'सिंहभूम शीयर ज़ोन' का हिस्सा है, जो केवल यूरेनियम ही नहीं, बल्कि दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के लिए भी अत्यधिक संभावनाशील है। परमाणु खनिज निदेशालय (एएमडी) जमशेदपुर के आसपास के नदी तटीय क्षेत्रों और अंतर्देशीय जलोढ़ (इनलैंड एल्यूवियम ) मिट्टी में मोनाजाइट की मौजूदगी का निरंतर अध्ययन कर रहा है। यहां मिलने वाले आरईई का उपयोग रक्षा उपकरणों, स्मार्टफोन की स्क्रीन और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में होता है, जिससे कोल्हान की 'टेक-मिनरल हब' के रूप में भी नई पहचान बन सकती है।ये है रेयर अर्थ एलिमेंटपूर्वी सिंहभूम के मोनाज़ाइट और एलैनाइट जैसे खनिजों में हल्के रेयर अर्थ एलिमेंट्स की प्रचुर संभावना मिली है। इनमें शामिल लैंथेनम और सीरियम का उपयोग बैटरी व उत्प्रेरक के रूप में होता है, जबकि प्रासियोडायमियम और नियोडायमियम इलेक्ट्रिक वाहनों एवं आधुनिक तकनीक के लिए अनिवार्य हैं। यह खोज क्षेत्र को औद्योगिक रूप से और समृद्ध बनाएगी।क्या है सिंहभूम शीयर ज़ोनसिंहभूम शीयर ज़ोन भू-वैज्ञानिक दृष्टि से भारत के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। यह लगभग 160 किलोमीटर लंबी एक पट्टी है, जो मुख्य रूप से पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पश्चिम सिंहभूम जिलों से होकर गुजरती है। इसे भारत का 'खनिज गलियारा' भी कहा जाता है क्योंकि देश के कई रणनीतिक और बहुमूल्य खनिज इसी संकीर्ण पट्टी में पाए जाते हैं। यह ज़ोन पश्चिम में चक्रधरपुर से शुरू होकर खरसावां, जमशेदपुर के दक्षिण (तुरामडीह, जादुगोड़ा) और मुसाबनी से होते हुए पूर्व में बहरागोड़ा तक फैला हुआ है। इसकी चौड़ाई अलग-अलग स्थानों पर 1 से 10 किलोमीटर के बीच है।
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