झारखंड में जल्द बनेगी महिला जेल, जिलों से मांगी गई रिपोर्ट
झारखंड सरकार ने महिला कैदियों के लिए अलग जेल बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सभी जिलों से महिला बंदियों की संख्या और सुविधाओं की रिपोर्ट मांगी गई है। वर्तमान में राज्य की जेलों में 621 महिलाएं हैं, लेकिन उनके लिए विशेष जेल नहीं है। प्रस्तावित जेलों में महिला स्टाफ की व्यवस्था होगी।

जमशेदपुर, संवाददाता। झारखंड में महिला कैदियों के लिए अलग जेल (एक्सक्लूसिव विमेंस जेल) बनाने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है। राज्य के सभी जिलों की जेलों से महिला बंदियों की संख्या और उनसे जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह कदम पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें महिला कैदियों के लिए अलग जेल की आवश्यकता पर चिंता जताई गई थी। राज्य के कारा विभाग के अनुसार, झारखंड की 31 जेलों में कुल 15,672 बंदी हैं, जिनमें 621 महिलाएं शामिल हैं। हालांकि महिलाओं के लिए कोई अलग विशेष जेल नहीं है, बल्कि उन्हें सामान्य जेलों में अलग वार्ड में रखा जाता है।
ऐसे में महिला बंदियों की सुरक्षा, गोपनीयता और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अलग जेल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य की सभी जेलों से यह जानकारी मांगी गई है कि वहां कितनी महिला बंदी हैं, उनके लिए क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। इन आंकड़ों के आधार पर महिला जेलों के निर्माण की रूपरेखा तैयार की जाएगी।देश में 1457 जेल, महिलाओं के लिए सिर्फ 43भारत में कुल 1457 जेलें हैं, लेकिन इनमें महिला जेलों की संख्या मात्र 43 है। यानी अधिकांश राज्यों में अभी भी महिलाओं को सामान्य जेलों में ही रखा जाता है। हालांकि, 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष महिला जेलें संचालित हो रही हैं, जहां महिला कैदियों के लिए अलग व्यवस्थाएं हैं।प्रदेश में 5 केंद्रीय काराझारखंड में वर्तमान में 5 केंद्रीय जेल, 18 जिला जेल, 7 उपकारा और 1 ओपन जेल संचालित हैं। इन सभी में महिलाओं के लिए अलग वार्ड तो हैं, लेकिन विशेष महिला जेल का अभाव लंबे समय से महसूस किया जा रहा है।महिला स्टाफ के अधीन होंगी महिला जेलप्रस्तावित महिला जेलों में पूरी व्यवस्था महिला स्टाफ के जिम्मे होगी, जिससे सुरक्षा और संवेदनशीलता सुनिश्चित की जा सके। सुधारात्मक पहल के तहत महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई, राखी निर्माण और अन्य हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे जेल से बाहर निकलने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें। इसके अलावा जिन महिला कैदियों के साथ छोटे बच्चे हैं, उनके लिए बच्चों को साथ रखने की विशेष सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।कानूनी प्रावधानों के अनुसार, महिलाओं की गिरफ्तारी सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही की जा सकती है। साथ ही उनकी तलाशी केवल महिला अधिकारी द्वारा ही ली जानी चाहिए। इन नियमों के पालन को भी महिला जेलों में और सख्ती से लागू किया जाएगा। कारा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार इस दिशा में ठोस निर्णय लेगी।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


