छोटे कारोबारियों पर दबाव, कारीगरों और रोजगार पर मंडराया संकट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सराफा बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमजोर मांग और ग्राहकों की बदली हुई खरीदारी प्रवृत्ति ने कारोबारियों को परेशान कर दिया है। छोटे कारोबारियों के लिए स्थिति बेहद कठिन हो गई है, जिससे उनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सराफा बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। सोना और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव, कमजोर मांग और ग्राहकों की बदली हुई खरीदारी प्रवृत्ति ने कारोबारियों को उधेड़बुन में डाल दिया है। बड़े ब्रांड जहां किसी तरह स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं छोटे और नए कारोबारियों के सामने शोरूम संचालन तक का संकट खड़ा हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि ज्वेलरी कारोबार अब केवल गहने बेचने तक सीमित नहीं रह गया है। एक आधुनिक शोरूम को चलाने के लिए भारी निवेश, लगातार संचालन व्यय, सुरक्षा, प्रशिक्षित कर्मचारी, साज-सज्जा और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई-नई डिजाइनों का स्टॉक रखना जरूरी हो गया है। ऐसे में बिक्री कमजोर होने पर सबसे ज्यादा दबाव छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है.
छोटे कारोबारियों के सामने अस्तित्व का संकट
शहर के बड़े कारोबारी कमल सिंघानिया ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किराये की दुकान लेकर नया ज्वेलरी शोरूम शुरू करता है तो उसे हर महीने 10 से 15 लाख रुपये तक का खर्च उठाना पड़ सकता है। इसमें किराया, बिजली, कर्मचारी, सुरक्षा, सजावट और अन्य संचालन खर्च शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में नया शोरूम चलाना बेहद कठिन हो गया है। किसी भी ज्वेलरी शोरूम को स्थिर होकर मुनाफे की स्थिति में आने में कम से कम तीन साल का समय लग जाता है। इतने लंबे समय तक पूंजी लगाना और नुकसान सहना हर कारोबारी के बस की बात नहीं है.
छोटे काम कराने भी नहीं आ रहे ग्राहक
मानगो के छोटे कारोबारी शरणजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने एक वर्ष पहले ही दुकान शुरू की थी, लेकिन जो स्टॉक लाया गया था उसका बड़ा हिस्सा अब तक नहीं बिक सका है। इससे पूंजी फंस गई है। उन्होंने कहा कि ग्राहक अब अधिक वैराइटी चाहते हैं, लेकिन सोना और चांदी के लगातार महंगे होने से उतना बड़ा स्टॉक रखना संभव नहीं है। ऑनलाइन या लैपटॉप पर डिजाइन दिखाने से ग्राहक संतुष्ट नहीं होते। यदि यही स्थिति बनी रही तो लंबे समय तक दुकान चलाना मुश्किल हो जाएगा.
बदल सकता है खरीदारी का पैटर्न
एक अन्य कारोबारी ने बताया कि शोरूम में केवल गहने रखना ही पर्याप्त नहीं होता। उसे आकर्षक बनाए रखने, सुरक्षा व्यवस्था, बिजली, कर्मचारियों और ग्राहकों की सुविधा पर हर महीने बड़ा खर्च होता है। इन खर्चों में आसानी से कटौती भी नहीं की जा सकती। यदि आमदनी कम हो जाए तो या तो दुकान बंद करनी पड़ती है या लंबे समय तक नुकसान सहने की क्षमता रखनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि बड़े ब्रांड, जिन्होंने पूंजी बाजार से पैसा जुटाया है या आईपीओ लाए हैं, वे कुछ समय तक स्थिति संभाल सकते हैं, लेकिन छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए यह दौर बेहद कठिन है.
रोजगार और कारीगरों पर भी असर की आशंका
साकची में ही गहनों की मरम्मत या जोड़-तोड़ करने वाले रंजन वर्मा ने कहा कि अभी तो ग्राहक ही कम आ रहे हैं। रोजगार पर संकट आ गया है। पहले एक लड़का भी काम पर था, लेकिन उसने भी छोड़ दिया है.
कारोबारी कमल सिंघानियां ने बताया कि प्रधानमंत्री ने जो अपील की है, वह कुछ सोचकर की होगी। लोगों के घरों में जो पुराने गहने रखे हैं, उन्हें बदलवाकर नया डिजाइन बनवाना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। इससे ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा और बाजार में कारोबार की गति भी बनी रहेगी.
कारोबारी विशाल झुनझुनवाला ने कहा कि यदि मांग लगातार घटती है तो इसका असर केवल रिटेल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर से जुड़े डिजाइनिंग, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, फाइनेंस, पॉलिशिंग, कास्टिंग यूनिट और छोटे कारीगर भी प्रभावित होंगे। यदि ऑर्डर घटे तो छोटे कारीगरों के सामने रोज़गार का संकट गहरा सकता है। पहले से ही कुशल कारीगरों की कमी है। ऐसे में यदि लगातार काम नहीं मिला तो कई कारीगर दूसरे रोजगार की ओर रुख कर सकते हैं। इससे भविष्य में उद्योग के सामने प्रशिक्षित मानव संसाधन का संकट और बढ़ सकता है.
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