जमशेदपुर बोले ::::::::::::::::::::::::
फोटो सरफराज शहर के मोहल्लों में खेल मैदानों का अभाव, खिलाड़ी चुनाव

फोटो सरफराज शहर के मोहल्लों में खेल मैदानों का अभाव, खिलाड़ी चुनाव में मांगेंगे हिस्सा ------------------------------------------------------ जमशेदपुर शहर जो दुनिया भर में खेल की मिसाल है, जहां तीरंदाजी से लेकर फुटबॉल तक के खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पदक लाते हैं, वहीं टाउनशिप को छोड़कर बाकी इलाकों में बच्चों के लिए एक भी खेल मैदान नहीं। न सरकारी मैदान, न खाली जमीन—बच्चे सड़कों पर, गलियों में या रेलवे ट्रैक के किनारे खेलने को मजबूर। टाटा स्टील के स्टेडियम और जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे विश्वस्तरीय सुविधाएं तो हैं, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे शुल्क नहीं दे पाते। परिणाम? प्रतिभाएं दब जाती हैं, स्वास्थ्य बिगड़ता है और भविष्य अंधकारमय।
इस बार शहरी निकाय चुनाव में शहर के खिलाड़ी एकजुट हो गए हैं। उन्होंने तय किया है कि हर प्रत्याशी से खेल मैदानों की मांग करेंगे। "निकाय क्षेत्र में कम से कम एक खेल मैदान जरूरी है, जहां बच्चे बिना किसी बाधा के खेल सकें," कहते हैं स्थानीय खिलाड़ी। मानगो का गांधी मैदान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है—जहां पहले बच्चे क्रिकेट खेलते थे, अब निकाय के वाहनों की पार्किंग और कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गया है। टाटा स्टील ने हाल ही में पांच नए ग्राउंड विकसित करने का ऐलान किया, लेकिन वो टाउनशिप तक सीमित। प्रखंड स्तर पर शहरी निकाय को जिम्मेदारी लेनी होगी। समस्या की जड़ें --------------------- शहर की आबादी बढ़ रही है। जमीन महंगी। निजी बिल्डर मैदानों को प्लॉट बना देते। सरकारी योजनाएं कागजों तक। गरीब बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित। डॉक्टर कहते हैं कि खेल न होने से मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता, एकाग्रता कम। समाधान की राह --------------------- खिलाड़ी संगठन चुनावी एजेंडा बना रहे। मांग है—हर वार्ड में 2 एकड़ का मैदान। बजट आवंटन। एनजीओ और टाटा के साथ पार्टनरशिप। स्कूलों में खेल शिक्षक। जमशेदपुर खेल का शहर है। लेकिन ये गौरव तब तक पूरा नहीं जब तक हर बच्चा खेल सके। चुनाव का समय है—प्रत्याशी सुनें, वादा करें, अमल करें। वरना खेल की विरासत सिर्फ टाउनशिप तक सिमट जाएगी। बच्चे सड़कों पर खेलते रहेंगे—खतरे में। जमशेदपुर के खेल गौरव ------------------------ जमशेदपुर ने देश को कई सितारे दिए। जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से निकले एथलीट्स ने एशियन गेम्स में पदक जीते। हाल ही में रसिक चंद्र हेसा ने नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स में तीन गोल्ड जीते। जामशेदपुर एफसी के खिलाड़ी माइकल सूसैरज ने आईएसएल में उम्दा प्रदर्शन किया। तीरंदाज अनु कुमारी ने चीन में मेडल जीता। लेकिन ये सब टाटा की सुविधाओं के बूते। बाहर के बच्चे? सिर्फ सपने। गांधी मैदान की बदहाली ------------------------- मानगो का गांधी मैदान कभी बच्चों का स्वर्ग था। अब यहां कचरे के ढेर, वाहनों की पार्किंग और निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। स्थानीय लोग कहते हैं, "फ्लाईओवर निर्माण के नाम पर मैदान को कब्जा लिया गया। बच्चे अब सड़क पर खेलते हैं। दुर्घटना का खतरा मोल लेते हुए।" शहर के नाम के पीछे खेल की विरासत छिपी है। 1920 के दशक से टाटा स्टील ने खेल को बढ़ावा दिया। जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, कीर्ति स्टेडियम ये सब अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। यहां क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बॉस्केटबॉल, रोलबॉल, तीरंदाजी, एथलेटिक्स, कबड्डी, टेनिस, बैडमिंटन, पर्वतारोहण जैसे दर्जनों खेल फल-फूल रहे हैं। जमशेदपुर के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स में देश का नाम रोशन किया है। लेकिन ये सफलताएं टाउनशिप (टाटा लीज एरिया) तक सीमित हैं। पूर्वी सिंहभूम के प्रखंडों मानगो, जुगसलाई, सिदगोड़ा, बहरागोड़ा, माटिहाना में स्थिति दयनीय है। यहां न कोई सरकारी मैदान, न खाली जमीन। बच्चे सड़कों पर क्रिकेट खेलते हैं, गाड़ियों के बीच फुटबॉल, या रेलवे लाइन के किनारे। दुर्घटनाएं आम हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेताते हैं। बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और मानसिक तनाव बढ़ रहा है क्योंकि आउटडोर प्ले जीरो है। शहरी निकाय चुनाव नजदीक हैं। खिलाड़ी संगठनों ने फैसला किया। हर प्रत्याशी से लिखित वादा लेंगे कि निकाय क्षेत्र में खेल मैदान बनाए जाएंगे। 10 प्रमुख अपेक्षाएं 1. हर वार्ड में कम से कम एक सरकारी खेल मैदान, जो फ्री हो। 2. सरकारी स्कूलों में खेल ग्राउंड और कोचिंग की व्यवस्था। 3. गरीब बच्चों के लिए फ्री स्पोर्ट्स किट और ट्रेनिंग। 4. मैदानों की नियमित रखरखाव और सफाई। 5. महिलाओं और लड़कियों के लिए अलग-अलग समय और सुविधाएं। 6. मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण। 7. खेल बजट में 10% बढ़ोतरी। 8. वार्षिक इंटर-स्कूल और प्रखंड स्तर के टूर्नामेंट। 9. पर्यावरण-अनुकूल सिंथेटिक ट्रैक और लाइटिंग। 10. खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता। खिलाड़ियों की प्रतिक्रियां क्रिकेटर, मानगो: "गांधी मैदान पर कचरा है। हम सड़क पर खेलते हैं। गाड़ी आ जाए तो भागना पड़ता है। चुनाव में मैदान मांगेंगे।" -तरण बच्चों खेलना चाहते हैं, लेकिन मैदान नहीं। घरेलू काम में व्यस्त रह जाते हैं। सरकारी मैदान फ्री हो तो प्रतिभा निकलेगी। -कुमार सुवर्ण राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी पदक जीते हैं, इनमें अधिकतर टाटा में ट्रेनिंग लेने के बाद खिलाड़ियों में निखार आती है। -आयुष कुमार जुगसलाई में बच्चे टीवी या मोबाइल पर रहते हैं। खेल मैदान न होने से मोटापा बढ़ रहा। चुनाव में ये मुद्दा उठना चाहिए -क्षितिज सिंह मानगो में एक दशक पहले जहां मैदान था, वह सब बिक गए। निकाय चुनाव में खिलाड़ी एकजुट होकर मैदान बनवाएंगे। -आदित्य प्रताप सिंह कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें ट्रेनिंग के लिए टाटा जाना पड़ता था। लोकल मैदान बनें तो गांव के बच्चे चमकें। -दुर्गेश कुमार स्कूलों में ग्राउंड हैं, लेकिन कब्जे में। सरकार हस्तक्षेप करे। चुनाव में वादा करे कि वह चुनाव जीतकर खेल मैदान बनाएंगे। -प्रिंस मिश्रा बच्चों को खेल की ट्रेनिंग के लिए दूर जाना पड़ता है। लोकल सुविधा हो तो प्रतिभा तो पनपने की संभावना रहती है। -रितेश पटेल टाटानगर के टाटा एरिया मे सब है, बाहर कुछ नहीं। चुनाव में खेल का मैदान मुद्दा बनना चाहिए। -आर्यन राज मानगो के गांधी मैदान की तरह कई ग्राउंड हैं, लेकिन सब जगह अतिक्रमण कर मकान बन गए हैं। -चेतन कुमार खेल से बच्चों में एकता बढ़ती है। बच्चे अनुशासित बनते हैं। मैदान न होने से समाज कमजोर हो जाता है। -अमन सिंह सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएं बर्बाद हो जाती है। निकाय चुनाव में खेल एजेंडा बनना चाहिए। -फैजान अनवर क्या कहते है जिम्मेवार मानगो में निकाय प्रशासन चाहे तो आधा दर्जन खेल का मैदान बन सकता हैं। इसके लिए इच्छाशक्ति होनी चाहिए। -अमलानश्री सरकार को चाहिए कि प्रत्येक मोहल्ले में एक खेल का मैदान बनाए। खाली जगह होने पर एक ही मैदान में कई तरह के खेल आयोजित हो जाएंगे। -उमा राव, स्कूल, क्लब और इंस्टीट्यूशन रिप्रेजेंटेटिव ऑफ जेएससीए
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


