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जमशेदपुर

संथाली का प्रथम राजभाषा नहीं बनना दुखद : सालखन

हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरPublished By: Newswrap
Mon, 24 Aug 2020 05:34 PM
संथाली का प्रथम राजभाषा नहीं बनना दुखद : सालखन

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने झारखंड की तीन प्रमुख आदिवासी भाषाओं मुंडारी, हो और कुडुख (उरांव) को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्रीय गृह मंत्री को भेजने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सराहना की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन तीन भाषाओं के साथ यदि खड़िया को भी सूची में शामिल कर प्रस्ताव भेजते तो और अच्छा रहता।

दूसरी ओर, उन्होंने भारत की सबसे बड़ी जीवंत आदिवासी भाषा संताली को अभी तक झारखंड की प्रथम राजभाषा का दर्जा नहीं दिए जाने पर दुख जताया है। उन्होंने राष्ट्रपति भवन से हुए पत्राचार की प्रति सीएम को भेजते हुए बताया है कि संथाली को प्रथम राजभाषा का दर्जा झारखंड सरकार और झारखंड विधान सभा के द्वारा प्रदान किया जा सकता है। ऐसा राष्ट्रपति भवन से मिले मार्गदर्शन में बताया गया है।

उन्होंने कहा है कि लंबे आंदोलन के बाद 22 दिसंबर 2003 को संविधान के आठवीं अनुसूची में संथाली को शामिल कर लिया गया था। इसके बावजूद आज तक उसका प्रथम राजभाषा नहीं बन पाना दुखद है।

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