
पुलिस को राइफल के साथ कैमरा चलाने का भी मिलेगा प्रशिक्षण
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू होने के बाद, पुलिस को राइफल और कैमरा चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। हर थाना में प्रशिक्षित पुलिसकर्मी होंगे जो कार्रवाई की वीडियोग्राफी करेंगे। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और अदालतों में मजबूत डिजिटल सबूत पेश करना है। वीडियोग्राफी अनिवार्य होने से पुलिस की कार्रवाई अधिक सटीक और प्रमाणिक होगी।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली में कई अहम बदलाव किए गए हैं। इन्हीं बदलावों के तहत अब राज्य भर के पुलिस जवानों को राइफल चलाने के साथ-साथ कैमरा चलाने का भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। आने वाले दिनों में हर थाना क्षेत्र में ऐसे प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी, जो छापेमारी, गिरफ्तारी और बरामदगी जैसी कार्रवाई की अनिवार्य वीडियोग्राफी कर सकें। बीएनएस में यह प्रावधान है कि पुलिस किसी भी छापेमारी, जांच या जब्ती की कार्रवाई करेगी, तो उसकी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करनी होगी। इसके पीछे मकसद कार्रवाई की पारदर्शिता बढ़ाना, आरोप-प्रत्यारोप की गुंजाइश कम करना और अदालतों में मजबूत डिजिटल सबूत प्रस्तुत करना है।
यही कारण है कि राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से ऐसे जवानों का चयन शुरू कर दिया है, जिन्हें विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। अब थाने में कम से कम एक ऐसे दक्ष पुलिसकर्मी होंगे पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार अब हर थाना स्तर पर एक या अधिक पुलिसकर्मी ऐसे होंगे, जो कैमरा संचालन, वीडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल-कैम तकनीक, फाइल प्रबंधन और डिजिटल एविडेंस सुरक्षित रखने में दक्ष होंगे। इन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन पुलिसकर्मियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले चरण में जिला केंद्रों पर प्रशिक्षण होगा, इसके बाद रेंज स्तर पर उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। बीएनएस की धाराओं के पालन में मिलेगी मजबूती अभी तक कई मामलों में कार्रवाई की वीडियो उपलब्ध नहीं रहने से जांच और अदालतों में कठिनाइयां आती थीं। लेकिन वीडियोग्राफी अनिवार्य होने से पुलिस की कार्रवाई अधिक सटीक और प्रमाणिक होगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि फर्जी आरोपों या विवादों में भी कमी आएगी। बीएनएस के प्रावधानों के बाद पुलिस की हर कार्रवाई को तकनीकी रूप से अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाना प्राथमिकता है। छापेमारी व जब्ती की वीडियोग्राफी अनिवार्य होने से न केवल कार्रवाई मजबूत होगी, बल्कि अदालतों में प्रस्तुत होने वाले सबूत भी अधिक विश्वसनीय बनेंगे। इस उद्देश्य से पूरे राज्य में पुलिस कर्मियों को चरणबद्ध तरीके से विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। - ए. विजयालक्ष्मी, आईजी (प्रशिक्षण)

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