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बजट: कृषि और पर्यटन के जरिए झारखंड के विकास को मिलेगी मजूबती

बजट: कृषि और पर्यटन के जरिए झारखंड के विकास को मिलेगी मजूबती

संक्षेप:

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट में मध्यम वर्ग, किसानों और पर्यटन उद्योग के लिए राहत के साथ-साथ झारखंड के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। नया आयकर अधिनियम 2025 और कृषि क्षेत्र में 1.37 लाख करोड़ रुपये का आवंटन, राज्य में आर्थिक संभावनाएं बढ़ाने में मदद करेगा।

Feb 02, 2026 05:57 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ आम नागरिकों को राहत देने और प्रमुख क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। मध्यम वर्ग, किसानों और पर्यटन उद्योग के लिए किए गए संतुलित प्रावधानों का सकारात्मक असर झारखंड जैसे खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य पर भी देखने को मिलेगा। राज्य के मध्यम वर्गीय करदाताओं के लिए बजट की अहम घोषणा नया आयकर अधिनियम 2025 है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। प्रत्यक्ष कर स्लैब में बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने और आयकर रिटर्न रिवाइज करने की समय सीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने से झारखंड के हजारों वेतनभोगी कर्मचारियों और छोटे व्यवसायियों को राहत मिली है।

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इसके अलावा मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह कर-मुक्त करने का निर्णय सड़क दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनेगा। पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से घोषित ‘फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स- डिस्क्लोजर स्कीम’ उन करदाताओं के लिए अवसर है, जो पूर्व में अपनी छोटी विदेशी संपत्तियों की जानकारी नहीं दे पाए थे। पर्यटन के क्षेत्र में टीसीएस की दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने से विदेशी यात्राएं सस्ती होंगी। वहीं, देश के 15 ऐतिहासिक स्थलों को वर्ल्ड-क्लास डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की योजना से झारखंड के सांस्कृतिक स्थलों को शामिल किए जाने की संभावना बनी है। ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी’ की स्थापना से राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कृषि प्रधान झारखंड के लिए कृषि क्षेत्र में 1.37 लाख करोड़ रुपये का आवंटन और ‘भारत विस्तार’ एआई एग्री टूल की शुरुआत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे किसानों को आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित सलाह मिलेगी। काजू और चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने का प्रावधान राज्य के पठारी क्षेत्रों में नई आर्थिक संभावनाएं पैदा कर सकता है। कुल मिलाकर बजट 2026 कर प्रणाली को सरल बनाते हुए तकनीक आधारित कृषि और पर्यटन विकास के जरिए ‘विकसित झारखंड से विकसित भारत’ की दिशा को मजबूती देता है। प्रो. पीके पाणि कुलपति, एनएसयू एवं पूर्व वित्त पदाधिकारी, कोल्हान विश्वविद्यालय