साइको जांच के बाद ही हाई स्पीड ट्रेनों को चला सकेंगे लोको पायलट
दक्षिण पूर्व रेलवे जोन हाई स्पीड ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट की टीम बना रहा है। टाटानगर समेत चक्रधरपुर मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर साइको जांच का अभियान शुरू हो गया है। इससे ट्रेन दुर्घटनाओं में कमी और यात्रियों की सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।

दक्षिण पूर्व रेलवे जोन हाई स्पीड ट्रेन (130 किलोमीटर प्रति घंटे) चलाने वाले लोको पायलट की टीम बना रहा है। टाटानगर समेत चक्रधरपुर मंडल के विभिन्न स्टेशनों के वरिष्ठ लोको पायलट की गार्डेनरीच में साइको जांच का अभियान शुरू हो गया है। रेलवे मनोवैज्ञानिक विभाग और अस्पतालों में अत्याधुनिक टेस्ट लैब बनाई गई है, जहां कंप्यूटर आधारित साइको जांच की जा रही है। इससे ट्रेन दुर्घटनाओं में कमी, सिग्नल पासिंग जैसी घटनाओं पर नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है। 110 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट जांच पास करने के बाद ही हाई स्पीड ट्रेनों पर ड्यूटी दे सकेंगे। जानकारों के अनुसार, टाटानगर के पांच दर्जन समेत राउरकेला, झारसुगुड़ा और चक्रधरपुर लॉबी के कुल 130 से ज्यादा लोको पायलट की साइको जांच हो चुकी है। साइको जांच में सफल पायलट वंदे भारत, राजधानी, दुरंतो तथा अन्य हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन कर सकेंगे。
सतर्कता से हादसा टालने की योजना
नवंबर 2025 में बिलासपुर मंडल में मेमू ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर के बाद रेलवे बोर्ड ने मालगाड़ी से प्रमोशन पाकर मेमू और एक्सप्रेस ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट की भी साइको जांच अनिवार्य कर दी है। ट्रेनों की बढ़ती स्पीड को देखते हुए लोको पायलट की एकाग्रता, मानसिक सतर्कता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और तनाव नियंत्रण की जांच समय-समय पर जरूरी है। रेलवे अब ‘फिट माइंड, सेफ ट्रेन’ मॉडल पर काम कर रहा है।
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