जेल के बंदियों में टीबी आशंका, एहतियातन 1600 की होगी जांच

Apr 06, 2026 05:33 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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जिले की केंद्रीय जेल घाघीडीह में तपेदिक (टीबी) की आशंका के चलते स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान शुरू किया है। करीब 1600 बंदियों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। आवश्यकतानुसार एक्सरे की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। गंभीर रूप से बीमार कैदियों को रांची के रिम्स भेजा जाएगा। हर सप्ताह स्वास्थ्य शिविर आयोजित होंगे।

जेल के बंदियों में टीबी आशंका, एहतियातन 1600 की होगी जांच

जिले की केंद्रीय जेल घाघीडीह में तपेदिक (टीबी) की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। घाघीडीह केंद्रीय जेल में बंद करीब 1600 बंदियों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। जिला सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से इसके लिए विशेष चिकित्सकीय टीम का गठन कर दिया गया है, जो नियमित रूप से जेल परिसर में जाकर बंदियों की जांच करेगी। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने बताया कि जेल जैसे बंद वातावरण में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका अधिक रहती है, खासकर टीबी जैसी बीमारी के मामले में सतर्कता बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है कि सभी बंदियों की चरणबद्ध तरीके से जांच की जाएगी।

उन्होंने बताया कि जांच अभियान के दौरान केवल सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण ही नहीं, बल्कि आवश्यकतानुसार एक्सरे की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बीमारी की सही और समय पर पहचान हो सके।डॉ. पाल ने कहा कि जांच के दौरान जिन बंदियों में टीबी के लक्षण पाए जाएंगे, उनका तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा। इसके लिए दवाइयों की पूरी व्यवस्था की गई है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर रूप से बीमार कैदियों को बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) भेजा जाएगा, जहां उनका समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह भी निर्णय लिया गया है कि जेल में हर सप्ताह स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। इनमें बंदियों की नियमित जांच के साथ उन्हें टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज के प्रति जागरूक भी किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता के अभाव में कई बार कैदी अपनी बीमारी को छिपाते हैं या समय पर इलाज नहीं कराते, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।जेल प्रशासन ने भी इस अभियान में पूरा सहयोग देने की बात कही है। जेल अधीक्षक ने बताया कि बंदियों की सूची तैयार कर ली गई है और जांच को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि कैदियों को निर्धारित समय पर जांच के लिए लाया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। गौरतलब है कि टीबी संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से तेजी से फैल सकती है। ऐसे में जेल जैसे सीमित और भीड़ वाले स्थानों पर इसका खतरा अधिक बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग का यह कदम न केवल बंदियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे जेल परिसर में बीमारी के फैलाव को भी रोका जा सकेगा।

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