Jamshedpur News: जय जगन्नाथ के उद्घोष से गूंजा शहर, महाप्रभु का दर्शन कर भक्त हुए निहाल

हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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Jamshedpur News: महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। रथ खींचनेवाले भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। बिष्टूपुर से साकची पहुंचने में इसे छह घंटे लगे। रथ उल्द्धई और धार्मिक उत्सवों के साथ भव्यता से सजाया गया था।

Jamshedpur News: जय जगन्नाथ के उद्घोष से गूंजा शहर, महाप्रभु का दर्शन कर भक्त हुए निहाल

Jamshedpur News: रिमझिम फुहारों के बीच जब महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा गुरुवार को भव्य रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले तो माहौल भक्तिमय हो गया। हर ओर जय जगन्नाथ की गूंज सुनाई दे रही थी। एक साथ हजारों लोग उद्घोष कर रहे थे। ढोल-मृदंग और झाल की मधुर धुन के बीच संकीर्तन के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। शहर में आठ से अधिक जगहों से रथयात्रा निकली, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। महाप्रभु का रथ खींचने को लेकर लोगों में होड़ रही। बिष्टूपुर राम मंदिर, साकची उत्कल एसोसिएशन, जुगसलाई रथ गली, बाराद्वारी गांधी आश्रम, बेल्डीह नागा मंदिर, सोनारी गीता भवन, देवस्थान मंदिर बर्मामाइंस और मानगो बड़ा हनुमान मंदिर से शोभायात्रा निकली। सभी जगहों से दोपहर में ही रथयात्रा निकलनी शुरू हुई।

रथ यात्रा का महत्व

बिष्टूपुर राम मंदिर में पूजा, भजन का सिलसिला सुबह 10 बजे से ही शुरू हो गया था। शाम 4 बजे रेशमी वस्त्रों से और फूलों से सजे रथ में सवार होकर भगवान दर्शन देने के लिए निकले। गाजे-बाजे के साथ भजन कीर्तन का दौर चलता रहा। रथ यात्रा में कई राजनीतिक पार्टियां शामिल हुईं। जगह-जगह सामाजिक संस्थाओं द्वारा भगवान जगन्नाथ की आरती उतारी गई। भक्त रथ यात्रा के स्वागत में नाचते गाते दिखे। रथ के आगे नाचते-गाते श्रद्धालुओं की टोली आस्था और उल्लास का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही थी। रथ की एक झलक पाने की श्रद्धालुओं में उत्सुकता रही।

भगवान का रथ खींचने के लिए उत्साह

भगवान का रथ खींचने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु घंटों पहले ही रथ की रस्सी पकड़कर खड़े रहे। भगवान जगन्नाथ को जैसे ही रथ पर विराजमान कराया गया, वैसे ही जय जगन्नाथ के उद्घोष से पूरा बिष्टूपुर गूंज उठा। इस दौरान राधाकृष्ण, शिव पार्वती के साथ ही कई झांकी भी साथ चलती रही। घुरती रथ 24 जुलाई को है। इस रथयात्रा से भगवान मौसीबाड़ी से वापस आएंगे।

बिष्टूपुर से साकची के लिए यात्रा

बिष्टूपुर से साकची पहुंचने में लगे छह घंटे

इस्कॉन की रथयात्रा यादगार बन गई। इसमें लगभग 20 हजार श्रद्धालु रथ खींचने को आतुर दिखे। रथयात्रा को बिष्टूपुर से साकची जेएनएसी चौक पहुंचने में छह घंटे लगे। जबकि दूरी मात्र 5 किमी रही। यहां रथयात्रा दोपहर तीन बजे से शुरू हुई और रात 9 बजे जेएनएसी चौक पहुंची। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ और भाई बलभद्र की रथ की ऊंचाई 24-24 फीट रही। जबकि बहन सुभद्रा के रथ की ऊंचाई 22 फीट थी। भगवान जगन्नाथ लाल-पीले रंग के रथ में सवार थे, जबकि भाई बलराम लाल और हरे रंग के रथ में, बहन सुभद्रा काले और लाल रंग के रथ में सवार थीं। रथयात्रा के सफल संचालन के लिए संस्थाओं के 1000 स्वयंसेवक लगाए गए थे। रथयात्रा के दौरान यह पहला मौका था, जिसमें स्कूली बच्चों ने ओडिसी या भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय विधाओं के माध्यम से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की महिमा का मंचन किया।

सामान्य प्रश्न

भक्तों ने रथ खींचने के लिए कब से तैयारी की थी?
भगवान का रथ खींचने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु घंटों पहले ही रथ की रस्सी पकड़कर खड़े रहे।
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