निजता से जुड़े कंटेंट फॉरवर्ड करने पर दर्ज हो सकता है केस
सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर किसी की निजी जानकारी साझा करना गंभीर अपराध है। गृह मंत्रालय ने पुलिस और साइबर सेल को एडवाइजरी जारी की है कि बिना अनुमति के फोटो या वीडियो शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। खासकर बच्चों और महिलाओं से जुड़े कंटेंट पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर किसी की निजी तस्वीर, वीडियो या निजी जानकारी को बिना अनुमति के साझा करना भारी पड़ सकता है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने इस संबंध में देशभर की पुलिस और साइबर सेल को सख्त कार्रवाई करने की एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी की निजता से जुड़े फोटो, वीडियो या निजी जानकारी को सोशल मीडिया या मैसेजिंग ग्रुप में फॉरवर्ड करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मंत्रालय ने विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं से जुड़े कंटेंट को लेकर सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी भी प्रकार का आपत्तिजनक, निजी या भ्रामक कंटेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम या अन्य डिजिटल माध्यमों पर साझा करने या आगे बढ़ाने वाले लोगों पर आईटी एक्ट और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया जा सकता है।साइबर अपराध से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें किसी की निजी तस्वीर या वीडियो को सोशल मीडिया ग्रुप में वायरल कर दिया गया। कई बार यह काम मजाक या अनजाने में किया जाता है, लेकिन इसका असर संबंधित व्यक्ति की सामाजिक और मानसिक स्थिति पर गंभीर पड़ता है। खासकर स्कूल-कॉलेज के छात्रों और महिलाओं से जुड़े कंटेंट के वायरल होने की घटनाओं को लेकर सरकार ने चिंता जताई है।जमशेदपुर में भी पिछले कुछ समय में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। पुलिस को शिकायत मिली है कि कुछ स्कूली छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में छात्राओं की तस्वीरें और निजी वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। इसी तरह महिलाओं के सोशल मीडिया ग्रुप में भी कई बार बिना पुष्टि किए निजी या संवेदनशील कंटेंट आगे बढ़ा दिया जाता है, जिससे विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई लोग यह समझते हैं कि उन्होंने सिर्फ किसी मैसेज को फॉरवर्ड किया है, इसलिए वे दोषी नहीं हैं। लेकिन कानून के अनुसार, किसी भी आपत्तिजनक या निजी कंटेंट को आगे बढ़ाना भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है। अगर कोई व्यक्ति इस तरह का कंटेंट अपने मोबाइल से किसी ग्रुप या व्यक्ति को भेजता है तो उसे भी उतना ही जिम्मेदार माना जा सकता है जितना मूल रूप से कंटेंट बनाने या पोस्ट करने वाले को। जमशेदपुर के साइबर डीएसपी मनोज ठाकुर ने बताया कि सोशल मीडिया पर किसी की निजी जानकारी या फोटो-वीडियो को बिना अनुमति के साझा करना गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि कई लोग बिना सोचे-समझे किसी भी फोटो या वीडियो को आगे बढ़ा देते हैं। अगर वह कंटेंट किसी की निजता से जुड़ा है या उसमें महिला या बच्चे शामिल हैं तो फॉरवर्ड करने वाला व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। ऐसे मामलों में आईटी एक्ट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार का संदिग्ध या निजी कंटेंट मिलने पर तुरंत डिलीट कर दें और आगे साझा न करें। साथ ही अगर किसी के साथ इस तरह की घटना होती है, तो वह तुरंत साइबर थाना या पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकता है।
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