ever naxalite explosion had left the studies, futuristic future in today's safe environment. - कभी नक्सली धमाकों से छोड़ी थी पढ़ाई, आज सुरक्षित माहौल में गढ़ रहे भविष्य DA Image
18 नबम्बर, 2019|4:53|IST

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कभी नक्सली धमाकों से छोड़ी थी पढ़ाई, आज सुरक्षित माहौल में गढ़ रहे भविष्य

कभी नक्सली धमाकों से छोड़ी थी पढ़ाई, आज सुरक्षित माहौल में गढ़ रहे भविष्य

पूर्वी सिंहभूम के नक्सल प्रभावित गांवों के शिक्षा से वंचित बच्चों के भविष्य संवारने का बीड़ा उठाया है जमशेदपुर के मनोज कुमार और उनकी पत्नी शिवा ने। बम धमाकों के बीच दो साल पहले स्कूल छोड़ चुके ये बच्चे अब मनोज के घर पर रहकर पढ़ रहे हैं।

2009 से सफर की शुरुआत : टाटा मोटर्स के अस्थायी कर्मचारी और बिरसानगर के मनोज ने पत्नी के साथ वर्ष 2009 में स्लम क्षेत्र के दो बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा से इस सफर की शुरुआत की थी। आज वे अपने घर में 35 वंचित बच्चों को रखकर न सिर्फ उनका पालन-पोषण कर रहे हैं, बल्कि बेहतर शिक्षा भी दे रहे हैं। मनोज मासिक वेतन से ही बच्चों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।

20 बच्चे नक्सल प्रभावित क्षेत्र के : घाटशिला के झांटीझरना की सात लड़कियों सहित 20 बच्चों ने इसीलिए पढ़ाई छोड़ दी थी, क्योंकि दो साल गांव के प्राथमिक विद्यालय के रास्ते में नक्सलियों का लगाया गया एक बम मिला था।अब ये बच्चे घर नहीं जाना चाहते घाटशिला के गांवों में मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के लिए जाने पर मनोज को बच्चों की पढ़ाई छूटने के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद इन्हें अपने यहां रखकर पढ़ाने का मन बनाया। अब ये बच्चे अब घर नहीं जाना चाहते। घाटशिला की झांटीझरना पंचायत के आालीडीह आमदा पहाड़ी, पटमदा व कांड्रा की लड़कियों समेत अन्य बच्चे मनोज व उनकी पत्नी से शिक्षा ले रहे हैं।

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