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‘नेकी की कमाई से होगी बरकत

श्रीगुरु नानक देवजी के 550वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में गुरुवार को कीताडीह गुरुद्वारा में कीर्तन दरबार शुरू हुआ। नानकशाही संवत 551 सिख नववर्ष पर संगत ने अपने गुरु का आशीष लिया। धर्म प्रचार कमेटी, जमशेदपुर अकाली दल और बैनर कीताडीह गुरुद्वारा कमेटी के तत्वावधान में महान कीर्तन समागम में पंथ प्रसिद्ध कथावाचक भाई हरप्रीत सिंह श्री दरबार साहिब अमृतसर वाले ने पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी रचित 12 माह के पहले शबद किरत कर्म के विछुड़े, कर कृपा मेले राम... अर्थात हम अपने कर्मों के कारण प्रभु के चरणों से दूर हो गए हैं। हे प्रभु हमें अपने चरणों में शरण दें... ऐसे गुरु उपदेशों से संगत को गुरु घर से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुरु के वचनों का हवाला देते हुए कहा कि नेकी से की गई कमाई की सराहना और बरकत मनुष्य पर बनी रहती है। ढाढी जत्था केवल सिंह अनमोल तरनतारन वाले ने भी गुरु नानक देवजी के जीवन का इतिहास संगत से साझा किया। भाई सुखविंदर सिंह अनमोल ने जत्थेदारी करते हुए संगत को बताया कि भाई लालू जो कि बढ़ई परिवार से थे। गुरुजी ने गरीब की कुटिया में रहना स्वीकार किया, लेकिन मलक भागो जो अमीर व्यक्ति थे उनके यहां जाना स्वीकार नहीं किया।

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