प्रशासन की सख्ती के बाद देर रात तक उखाड़े गए टेंट, काड़ा लड़ाई के आयोजक को झटका
पटमदा के पलाशडीह गांव में काड़ा (भैंसा) लड़ाई का आयोजन जिला प्रशासन की सख्ती के कारण रद्द कर दिया गया। पिछले आयोजन में एक व्यक्ति की मौत और उसके पुत्र के घायल होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। रविवार को निर्देश मिलने के बाद पुलिस ने आयोजन स्थल पर तैयारियां खत्म कर दीं।

पटमदा: बोड़ाम थाना क्षेत्र अंतर्गत पलाशडीह गांव में सोमवार को आयोजित काड़ा (भैंसा) लड़ाई का कार्यक्रम जिला प्रशासन की सख्ती के बाद स्थानीय प्रशासन ने बंद करवा दिया है। इससे काड़ा लड़ाई के आयोजक को जहां झटका महसूस हुआ है वहीं इसके प्रेमियों को बड़ी निराशा हाथ लगी है। गौरतलब हो कि पिछले 12 जनवरी को बोड़ाम के ही जोबा गांव में आयोजित काड़ा लड़ाई के दौरान भागने के क्रम में एक भैंसा के हमले में जोबा गांव निवासी 55 वर्षीय सुभाष कर्मकार की मौत हो गई थी जबकि उसका पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गया है। इसके बाद घटना की रिपोर्ट मीडिया में प्रकाशित होने एवं जिले के उपायुक्त की ओर से मामले को गंभीरता से लेने पर स्थानीय पुलिस-प्रशासन हरकत में आया और आयोजन समिति से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में जांच शुरू कर दी गई।
इससे यह अनुमान लग रहा था कि क्षेत्र में अब फिर से प्रतिबंधित काड़ा लड़ाई का आयोजन नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद सोमवार को (बांग्ला 5 माघ) काड़ा लड़ाई के आयोजन की पूरी तैयारी कर ली गई थी। इसकी आसूचना जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद रविवार को ही देर शाम को अनुमंडल कार्यालय से निर्देश जारी किया गया। बोड़ाम अंचल कार्यालय एवं थाना को काड़ा लड़ाई बंद कराने का निर्देश मिलने के बाद बोड़ाम पुलिस ने देर रात तक पलाशडीह गांव के मैदान में तैयार टेंट उखड़वा दिया।
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