सर्पदंश के मरीजों की जान बचाने को प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण की मांग

May 07, 2026 02:31 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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सर्पदंश के इलाज के लिए प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। जूनियर डॉक्टर नेटवर्क ने सिविल सर्जन को पत्र लिखा है। बरसात में मरीजों की संख्या बढ़ती है, और समय पर इलाज से 90 फीसदी मरीजों को बचाया जा सकता है। प्राथमिक उपचार की कमी भी एक समस्या है।

सर्पदंश के मरीजों की जान बचाने को प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण की मांग

सर्पदंश के इलाज को लेकर प्रखंड स्तर तक प्रशिक्षण और दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। इसे लेकर जूनियर डॉक्टर नेटवर्क ने सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय को पत्र लिखा है। जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सर्पदंश के काफी मामले सामने आते हैं। बरसात के मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है, जबकि अन्य समय में हर महीने करीब 12 से 15 मरीज आते हैं। लगभग इतने ही वयस्क मरीज भी होते हैं। मरीजों को अक्सर देर से एमजीएम अस्पताल लाया जाता है, जिससे उन्हें बचाने में कठिनाई होती है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए तो उसे बचाना आसान हो जाता है और करीब 90 फीसदी मरीजों को बचाया जा सकता है।

प्राथमिक उपचार की कमी

बताया गया कि सांप काटने पर लोग पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जाते हैं। वहां पर्याप्त प्रशिक्षण और दवाइयों की कमी के कारण अधिकतर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। प्राथमिक उपचार के तौर पर वहां जरूरी इंजेक्शन दिया जाना चाहिए, ताकि जहर का असर कम हो और इसके बाद मरीज को एमजीएम भेजा जाए।

जिम्मेदारी का ध्यान

एमजीएम में शिशु रोग विभाग के डॉक्टर और जूनियर डॉक्टर नेटवर्क के राज्य सचिव डॉ. राघवेन्द्र ने बताया कि उन्होंने नेटवर्क के माध्यम से सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय को पत्र भेजकर मांग की है कि प्रखंड स्तर के अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों को सर्पदंश के प्राथमिक इलाज का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि अधिक से अधिक मरीजों की जान बचाई जा सके।

ये हैं लक्षण

सांप के काटने पर लक्षणों के आधार पर तुरंत पहचान करना जरूरी है। करैत सहित अन्य विषैले सांप के काटने पर लकवा, पेट दर्द और आंख की पुतली झुकने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके साथ ही ललाट पर सिकुड़न आने लगती है। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए। यदि इलाज में देरी होती है तो स्थिति गंभीर हो सकती है। आगे चलकर आंख से खून आना, पेशाब में खून आना और बोलने में सुस्ती बढ़ने जैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं।

प्रश्नोत्तर

सर्पदंश के इलाज में किस प्रकार की दवाइयों की आवश्यकता होती है?
प्राथमिक उपचार के तौर पर जरूरी इंजेक्शन दिया जाना चाहिए, ताकि जहर का असर कम हो।
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