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साइबर ठगों ने लंदन के लोगों से की करोड़ों की ठगी, इंटरनेट कॉलिंग से फंसाते थे

जमशेदपुर के गोलमुरी से गिरफ्तार सात साइबर ठगों के गिरोह ने सर्वाधिक ठगी लंदन के लोगों से की। उनके मोबाइल की क्लोनिंग करने के बाद उनके खातों से...

साइबर ठगों ने लंदन के लोगों से की करोड़ों की ठगी, इंटरनेट कॉलिंग से फंसाते थे
हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरMon, 24 Jun 2024 06:00 PM
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जमशेदपुर के गोलमुरी से गिरफ्तार सात साइबर ठगों के गिरोह ने सर्वाधिक ठगी लंदन के लोगों से की। उनके मोबाइल की क्लोनिंग करने के बाद उनके खातों से रुपयों को ट्रांसफर कर लेते थे। इनमें दो कंप्यूटर इंजीनियर हैं, जो गिरोह के सरगना थे। वे रात में विदेश में रहने वालों को अपने जाल में फंसाते थे। इसमें अमरीक सिंह नामक कंप्यूटर इंजीनियर ऐसा था, जो विदेश के लोगों का डाटा उपलब्ध कराता था। सभी आरोपियों को रविवार को जेल भेज दिया गया। यह जानकारी एसएसपी किशोर कौशल ने दी शनिवार को प्रेसवार्ता में दी।
गिरोह का मुख्य सरगना टेल्को घड़ी पार्क के पास रहने वाला कंप्यूटर इंजीनियर सौरभ कुमार सिन्हा और साइबर क्राइम के लिए जगह उपलब्ध कराने वाला रमीज रजा खान पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश के लिए छापेमारी कर रही है।

ये हुए हैं गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों में गोलमुरी टुइलाडुंगरी निवासी अमरीक सिंह उर्फ रिंकू, कोलकाता दत्ता लेन निवासी विवेक गुप्ता, कोलकाता बगोई पाड़ा निवासी तनुप दास, हावड़ा निवासी गौरव चौधरी, मनीष चौधरी, संदीप कुमार राम और प्रवीण चौधरी शामिल हैं।

ये सामान हुए बरामद

पुलिस ने आरोपियों के पास से कुल 13 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 7 लैपटॉप चार्जर, 1 स्वाइप मशीन और 13 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। इसके अलावा कई ऐसे दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनके जरिए रुपयों की निकासी व ट्रांसफर करने का उसमें विवरण है।

ठगों का लिंक मिला जमशेदपुर का

एसएसपी को गुप्त सूचना मिली थी कि जमशेदपुर का एक गिरोह है, जो न सिर्फ देश में बल्कि विदेश के लोगों को भी अपना शिकार बना रहा है। उन ठगों का लिंक गोलमुरी का मिला। इस सूचना पर बिष्टूपुर थाने में रमीज रजा खान के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद बिष्टूपुर थाना प्रभारी उमेश कुमार ठाकुर और गोलमुरी पुलिस ने संयुक्त रूप से मुस्लिम बस्ती स्थित रमीज रजा खान के घर छापेमारी की। मौके से पुलिस ने सातों आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

50 हजार वेतन और मिलता था कमीशन

सौरभ सिन्हा और रमीज रजा खान दोनों ही मिलकर साइबर ठगों की कंपनी चलाते थे और अपने यहां काम करने वालों को अधिकतम 50 हजार तक वेतन देते थे। इसके अलावा प्रति शिकार कमीशन भी दिया जाता था। अमरीक को एक डाटा में ठगी की प्रक्रिया सफल होने पर 5000 रुपए दिए जाते थे। सौरभ का साला दीपू उर्फ गुरदीप सिंह खाने पीने का सामान उपलब्ध कराता था। जिस दिन कोई बड़ी ठगी होती थी, उस दिन शराब की पार्टी चलती थी। हावड़ा का रहने वाला दिलीप, सौरभ को मैनपावर की सप्लाई भी करता है। ठगी का पैसा सौरभ सिन्हा के पास ऑनलाइन के माध्यम से मंगाया जाता था।

ऐसे बनाते थे लोगों को अपना शिकार

रोज शाम 7 बजे से काम शुरू कर दिया जाता था और यह काम सुबह 7 बजे तक चलता था। इसके लिए अमरीक सिंह विदेशियों का डाटा उपलब्ध कराता था। इस दौरान लोगों से इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से संपर्क कर उन्हें अपने जाल में फंसाकर रिमोट कंट्रोल ऐप (एनी डेस्क, स्पेयर पार्ट्स एप) से लोगों का मोबाइल क्लोन कर लेते थे। इसके अलावा क्रिप्टो करेंसी और वेस्टर्न यूनियन मनी ग्राम के माध्यम से भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था।

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