सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला, जमशेदपुर ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का उत्सव मनाया

Newswrap हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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CSIR-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला, जमशेदपुर ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का उत्सव मनाया। प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने तकनीकी विकास के लिए मानवता व समानता को केंद्र में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल क्षमताओं का उपयोग करके तकनीकी विकास की दिशा में आगे बढ़ने की बात की।

सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला, जमशेदपुर ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का उत्सव मनाया

सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला, जमशेदपुर ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का उत्सव मनाया। यह दिवस देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों को स्मरण करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रो. सुमन चक्रवर्ती, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। डॉ. संदीप घोष चौधरी, निदेशक, सीएसआईआर– एनएमएल ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा भविष्य निर्माण में अनुसंधान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने पिछले एक वर्ष में सीएसआईआर– एनएमएल द्वारा विकसित उन तकनीकों की जानकारी भी दी, जो व्यावसायीकरण के लिए तैयार हैं। डॉ. के.के. साहू, समन्वयक, एसीएसआईआर, तथा कार्यक्रम के समन्वयक ने मुख्य अतिथि का परिचय कराया तथा प्रो. सुमन चक्रवर्ती की विभिन्न उपलब्धियों पर प्रकाश डाला。

प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती का व्याख्यान

प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने “समावेशी विकास हेतु उत्तरदायी नवाचार – गहन विज्ञान से गहन सामाजिक प्रभाव तक” विषय पर व्याख्यान दिया। अपने शोध अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास की प्रक्रिया केवल बाजार और लाभ तक सीमित न होकर मानवता, समानता एवं सतत विकास को भी केंद्र में रखनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तकनीक का विकास स्थानीय आवश्यकताओं एवं उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए।

भारत की डिजिटल क्षमताएँ

उन्होंने आगे कहा कि भारत की उन्नत डिजिटल क्षमताएँ, सामाजिक-आर्थिक विविधता, ग्रामीण जटिलताएँ, स्वास्थ्य संबंधी असमानताएँ तथा विशाल जनसांख्यिकीय ऊर्जा को तकनीकी विकास की दिशा में उपयोग किया जाना चाहिए। प्रो. चक्रवर्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन “विज्ञान सार्वभौमिक है, लेकिन तकनीक स्थानीय होनी चाहिए” का उल्लेख करते हुए स्थानीय आकांक्षाओं के अनुरूप तकनीक विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अपने व्याख्यान का समापन इस संदेश के साथ किया कि वास्तविक तकनीकी प्रगति तब होती है जब तकनीक मानव पीड़ा को कम करे, अवसरों का विस्तार करे, समानता को बढ़ावा दे, पर्यावरण की रक्षा करे तथा मानवता को सशक्त बनाए।

अन्य कार्यक्रम और गतिविधियाँ

इस अवसर पर प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने सीएसआईआर– एनएमएल की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 का भी विमोचन किया। डॉ. एस. के. पाल, प्रमुख, आरपीबीडी प्रभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत संस्थान के पीएचडी शोधार्थियों द्वारा पोस्टर प्रस्तुति का आयोजन किया गया तथा MSME प्रतिनिधियों के लिए संस्थान की विभिन्न सुविधाओं का भ्रमण भी कराया गया। अरका जैन विश्वविद्यालय तथा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट / अभियांत्रिकी एवं प्रबंधन संस्थान के छात्र एवं शिक्षक भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। छात्रों के लिए प्रयोगशाला भ्रमण का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एसीएसआईआर साइंस क्लब द्वारा किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का उद्देश्य क्या है?
यह दिवस देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों को स्मरण करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
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