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क्रिस्टल सिलिका धूलकणों से बचें, नहीं तो होगा सिलिकोसिस : कारखाना निरीक्षक

कारखाना निरीक्षक विनीत कुमार ने कहा कि कंपनी में कार्यस्थल से उत्सर्जित क्रिस्टल सिल्का धूलकणों से बचे नहीं तो कोई भी सिलिकोसिस की चपेट में आ सकते हैं। संभव हो तो धूल उत्सर्जन क्षेत्र में काम न करें। करे भी तो मास्क लगाएं, काम समाप्ति के बाद ड्रेस को हर दिन धोए और स्नान करके घर जाएं। इससे आप और आपका परिवार, दोनो सुरक्षित रहेगा। वे जमशेदपुर कारखाना निरीक्षक कार्यालय द्वारा शनिवार को जोजोबेड़ा सीमेंट प्लांट, न्युवोको में सिलिकोसिस पर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कुमार ने बताया कि सिलिकोसिस तीन प्रकार के, हठीली सिलिकोसिस (10 वर्षों में), त्वरित सिलिकोसिस (5 से 10 वर्ष में) और तीव्र सिलिकोसिस (कुछ सप्ताह या महीने में) होते हैं। क्रिस्टल सिल्का धूलकण के रूप में श्वास द्वारा हमारे फेफड़े में प्रवेश करते हैं और मास्क का उपयोग नहीं करने पर यह तेजी से बढ़ता है और इससे मरीज की मौत भी हो सकती है। इसलिए जहां भी धूलकण का उत्सर्जन होता है वहां कंपनी भी डस्ट अवशोषित मशीन लगाएं। इस मौके पर उपमुख्य कारखाना निरीक्षक बीए कुमार, न्युवोको के एचआर हेड विनय दुबे, चीफ सेफ्टी ऑफिसर श्रीकांत सिंह, टाटा पावर के चीफ सेफ्टी ऑफिसर संजीव कुमार सहित कंपनी कर्मचारी उपस्थित थे।

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  • Web Title:Crystal silica will be left out of dust, otherwise silicosis