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21 सितम्बर, 2020|6:14|IST

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अस्पतालों से ज्यादा होम आईलोशन में कोरोना मरीज

अस्पतालों से ज्यादा होम आईलोशन में कोरोना मरीज

होम आईसोलेशन में रह रहे जुगसलाई के गौशाला चौक निवासी व्यक्ति की शनिवार रात हुई मौत के बाद जिला प्रशासन की तंद्रा भंग हुई है। अब होम आईसोलेशन में रह रहे लोगों से पूछा जा रहा है कि अस्पताल या कोविड केयर सेंटर में रहना है तो बताएं। वहां रहना उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहेगा। खास तौर से उनसे, जिनमें अब कोरोना के लक्षण परिलक्षित हो गए हैं।

इससे पहले जिन्होंने भी होम आईसोलेशन में रहने की इच्छा जताई, सभी को अनुमति मिल गई। परंतु इसके साथ जो शर्त है, उसका पालन अधिकांश नहीं कर रहे हैं। वह है थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर रखना। थर्मामीटर तो सभी रखते हैं, परंतु शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बताने वाले ऑक्सीमीटर इक्का-दुक्का के लोगों के ही पास है। इसकी वजह इसका महंगा होना है। डेढ़ से दो हजार रुपये इसकी लागत बताई जाती है। ऑक्सीमीटर नहीं होने पर कोरोना पीड़ित के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा यदि अचानक कम हो जाए तो उसे पता ही नहीं चलता और जान पर बन आ रही है।

1321 हैं होम आईसोलेशन में

30 अगस्त तक पूर्वी सिंहभूम जिले में कोरोना के कुल 2241 एक्टिव मरीज थे। इनमें से 1321 होम आईसोलेशन में, जबकि 920 अस्पतालों एवं कोविड केयर सेंटरों में इलाजरत हैं। इस प्रकार अस्पताल या कोविड केयर सेंटर की तुलना में होम आईसोलेशन अधिकांश की पसंद बन गया है।

17 दिनों बाद बिना जांच माने जाएंगे निगेटिव

यदि कोई कोरोना पॉजिटिव मरीज होम आईसोलेशन में रह रहा है और 17 दिनों तक उसकी दोबारा जांच नहीं होती है तो उसे निगेटिव माना जाएगा। हालांकि ऐसा तब होगा यदि उस व्यक्ति को कोई शारीरिक परेशानी नहीं हो और वह बेहतर महसूस करता हो। हालांकि इसके बावजूद नियमानुसार वह 14 दिनों तक घर में ही रहेगा। निगेटिव होने के बाद उसकी घर की सीलिंग खोल दी जाएगी।

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  • Web Title:Corona patients in Home Illusion more than hospitals