
मानगो नगर निगम बनने पर भी दूर न हो सकीं पानी-बिजली और कचरा की समस्याएं
एक और साल विदाई की दहलीज पर खड़ा है, लेकिन मानगो की समस्याएं जस की तस हैं। 50 साल में नगर निगम का गठन हुआ, लेकिन चुनाव और बुनियादी सुविधाएं अभी तक नहीं मिलीं। कचरा प्रबंधन और पेयजल की समस्याएं भी हल नहीं हुईं। नागरिकों की मुख्य मांगें लोकतांत्रिक अधिकार और बेहतर सेवाएं हैं।
एक और साल विदाई की दहलीज पर खड़ा है। कैलेंडर बदलने वाला है, लेकिन लौहनगरी के एक बड़े हिस्से मानगो में कुछ नहीं बदल पाया। लंबे समय से समस्याएं जस की तस हैं। मानगो अधिसूचित क्षेत्र समिति (अब मानगो नगर निगम) के गठन को इस साल 50 वर्ष पूरे हो गए, लेकिन विडंबना यह है कि यहां की जनता की न कचरा निष्पादन की समस्या दूर हो पाई और न पानी-बिजली की। यही नहीं, अपने प्रतिनिधि चुनने का तीसरे मत का अधिकार नहीं मिल सका। मानगो अधिसूचित क्षेत्र समिति की घोषणा 8 जनवरी 1975 को हुई थी और इसने 1979 से पूर्ण रूप से काम करना शुरू किया।
शुरुआती दौर में जनता की सहूलियत के लिए राज्यपाल द्वारा समाजसेवियों को वार्ड कमिश्नर के रूप में मनोनीत किया जाता था। मनोनयन का यह सिलसिला 1991 तक चला, लेकिन उसके बाद से न तो चुनाव हुए और न ही मनोनयन। हालांकि, सरकार ने पिछले साल मानगो को नगर निगम का दर्जा तो दे दिया, लेकिन बिना मेयर और पार्षदों के यह निगम सिर्फ कागजी शेर बनकर रह गया। चुनाव की राह में ओबीसी आंकड़ों का रोड़ा मानगो नगर निगम में चुनाव कराने का सरकार का वादा हर बार खोखला साबित होता रहा है। चुनाव जल्द होंगे, लेकिन पेच ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) की गणना पर अटका हुआ है। जिला कार्यालय के पास मतदाताओं की सूची में ओबीसी का सटीक आंकड़ा न होने से चुनावी प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है। जेएनएसी जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के इलाके में भी स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं रही। जनता साल भर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, मोहरदा जलापूर्ति और बस्तियों में नल कनेक्शन के लिए गुहार लगाती रही, लेकिन प्रशासन और टाटा यूआईएसएल (पहले जुस्को) के बीच तालमेल की कमी साफ दिखी। आरोप लगते रहे कि जेएनएसी एक स्वतंत्र इकाई के बजाय टाटा यूआईएसएल के कामकाज पर मुहर लगाने वाला रबर स्टैंप बनकर रह गया है। सफाई की जिम्मेदारी अब निकायों से हटकर क्यूब एजेंसी को दे दी गई है, लेकिन शहर में कचरे का शत-प्रतिशत उठाव अब भी सपना है। एजेंसी संसाधनों की कमी का रोना रोती रही, जिसके बाद मानगो निगम और जेएनएसी ने मिलकर लगभग 14 करोड़ रुपये के संसाधनों की खरीदारी की। साल 2025 की विदाई के वक्त भी शहर की सड़कों पर कचरे के ढेर एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। अधूरी रह गईं ये ख्वाहिशें मानगोवासियों की सबसे बड़ी हसरत अपना मेयर और वार्ड पार्षद चुनने की थी, जो इस साल भी अधूरी रही। बस्तियों के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का वादा फाइलों में ही दौड़ता रहा। जेएनएसी को सशक्त और स्वतंत्र निकाय के रूप में देखने की इच्छा रखने वाली जनता को इस साल भी निराशा ही हाथ लगी। मानगो पुल और आसपास के इलाकों में यातायात की समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान धरातल पर नहीं उतरा। नई एजेंसी और करोड़ों के खर्च के बाद भी शहर को गार्बेज फ्री बनाने का लक्ष्य अधूरा रहा। कंपनी एरिया की तरह मिले सुविधा जमशेदपुर के शहरी निकायों (जेएनएसी, मानगो नगर निगम और जुगसलाई) में रहने वाले लोगों की मुख्य उम्मीदें लोकतांत्रिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं में समानता से जुड़ी हैं। सबसे बड़ी मांग निकाय चुनाव कराकर तीसरे मत का अधिकार पाने की है, ताकि स्थानीय प्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह हों। नागरिक चाहते हैं कि टाटा स्टील क्षेत्रों की तर्ज पर उन्हें भी बिजली-पानी, बेहतर सीवरेज सिस्टम और जाम मुक्त सड़कें मिलें। मानगो जैसे सघन क्षेत्रों में फ्लाईओवर का निर्माण और कचरा प्रबंधन में सुधार प्राथमिकता है।

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