मंदिरों में वासंती नवरात्र की तैयारी पूरी, कलश स्थापना कल

Newswrap हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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जमशेदपुर में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होगी। पहले दिन कलश स्थापना होगी और 9 दिनों तक माता की पूजा होगी। कालीबाड़ी मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। प्रमुख रस्मों में सप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी शामिल हैं। विशेष रूप से इस बार नवमी पर कुंवारी माता पूजा का आयोजन किया जाएगा।

मंदिरों में वासंती नवरात्र की तैयारी पूरी, कलश स्थापना कल

जमशेदपुर, संवाददाता। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार यानी 19 मार्च से हो रही है। पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी। इसके बाद पूरे 9 दिन तक माता की पूजा-आराधना होगी। शहर के कालीबाड़ी मंदिरों में वासंती नवरात्रि की तैयारी पूरी कर ली गई है। मंदिरों में पूजा के साथ ही कई सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जमशेदपुर कालीबाड़ी आश्रम बेल्डीह 19 मार्च को कलश स्थापना और चंडी पाठ के साथ शुरू होगा। 24 मार्च की सुबह षष्ठी पूजा होगी। 24 मार्च की शाम को देवी का औपचारिक आह्वान 6.30 बजे होगा, जिसके बाद भक्तों के लिए आनंद मेला लगेगा। 25 मार्च की सुबह पारंपरिक नवपत्रिका एंट्री और पूजा के साथ सप्तमी की रस्में की जाएंगी।

शाम को भक्तों और विज़िटर्स के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। महाअष्टमी पूजा 26 मार्च की सुबह 7.02 बजे शुरू होगी। रस्मों में पुष्पांजलि और पवित्र संधि पूजा शामिल होगी, जिसे त्योहार की सबसे जरूरी रस्मों में से एक माना जाता है। शाम को फिर से कल्चरल प्रोग्राम होंगे। 27 मार्च की सुबह नवमी पूजा होगी। इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाएगी। महानवमी पर खास कुमारी पूजा भी होगी। त्योहार 28 मार्च की सुबह 8.33 बजे दशमी पूजा और दर्पण विसर्जन के साथ खत्म होगा। वासंती नवरात्र को लेकर कालीबाड़ी मंदिरों में बंगाली रीति रिवाज से मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है। वहां नवमी पर इस बार विशेष तौर पर कुंवारी माता पूजा का आयोजन किया जाएगा।कलश स्थापना का मुहूर्त : चैत्र नवरात्र में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। 19 अप्रैल को कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त रहेंगे। सबसे पहले मुहूर्त सुबह 6.52 बजे से 7.43 बजे, जबकि शुभ अभिजीत मुहूर्त  दोपहर 12.05 से लेकर 12.53 बजे तक तक रहेगा।ज्योतिषाचार्य संतोष त्रिपाठी ने बताया कि पहले दिन घट स्थापना की जाती है और अखंड ज्योति जलाई जाती है। वैसे तो नवरात्र के हर दिन का खास महत्व होता है, लेकिन आखिरी के तीन दिन सप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अष्टमी और नवमी पर घर-घर में पूजा, हवन, कन्या पूजन आदि धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। वहीं, जो लोग नौ दिन का व्रत रखते हैं, वे अष्टमी-नवमी पर इसका पारण करते हैं। चैत्र नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी और महानवमी की तिथि नवरात्रि के आठवें दिन महा अष्टमी मनाई जाती है।

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