
श्री राजस्थान शिवमंदिर जुगसलाई में 26 से होगी नानी बाई रो मायरो की कथा
श्री राजस्थान शिवमंदिर जुगसलाई अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने पर भव्य कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। तीसरा आयोजन नानी बाई रो मायरो की कथा का होगा, जो 26 से 30 दिसंबर 2025 तक चलेगा। प्रसिद्ध कथा वाचक चंद्र प्रकाश शास्त्री इस कथा को सुनाएंगे, जिसमें भक्त नरसी मेहता और उनकी बेटी की लाज बचाने की कथा है।
शहर की पुरानी और लब्ध प्रतिष्ठित धार्मिक संस्था श्री राजस्थान शिवमंदिर जुगसलाई अपनी स्थापना के सौ वर्षों के गौरवशाली सफर के 2026 में पूरे होने के अवसर पर वर्ष व्यापी भव्य कार्यक्रमों का आयोजन करने जा रहा है। शताब्दी वर्ष समारोहों की कड़ी में तीसरा आयोजन नानी बाई रो मायरो की आध्यात्मिक उर्जा से भरपूर कथा होगा। यह आयोजन श्री राजस्थान शिवमंदिर जुगसलाई जमशेदपुर के भव्य शीत ताप बैंक्वेट हाल नारायणम में 26 से 30 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से होगा। नानी बाई रो मायरो की कथा राजस्थान के सुप्रसिद्ध कथा वाचक खाचरियावास निवासी चंद्र प्रकाश शास्त्री सुनाएंगे।

इस कथा का सार संक्षेप यह है कि राजस्थान में बहुत ही बड़े श्रीकृष्ण भक्त थे नरसी मेहता। जिनके पास श्री कृष्ण भक्ति की अपार भक्ति थी। लेकिन वे अत्यंत निर्धन थे। एक समय उनकी पुत्री नानी बाई की पुत्री के विवाह का समय आया ओर नानी बाई ने अपने पिता भक्त शिरोमणि नरसी मेहता को विवाह की खबर देते हुए मायरो भरने के लिए भी न्योता दिया। अब भक्त नरसी मेहता तो बहुत गरीब थे, बेटी नानी बाई के यहां मायरा कहां से भरते। तब उन्होंने मायरा भरने के लिए अपने आराध्य श्रीकृष्ण से गुहार लगाते हुए अपनी और अपनी बेटी नानी बाई की उसके सुसराल में लाज बचाने हेतु प्रार्थना की।इस प्रार्थना को सुन भगवान् श्रीकृष्ण ने स्वयं नानी बाई के सुसराल में पहुंच कर कैसे 56 करोड़ का मायरा भरने के साथ ही भक्त नरसी मेहता और नानी बाई की लाज बचाई। इसी मार्मिक प्रसंग पर आधारित है यह कथा।

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