Candidates will have to print the details of the crime - प्रत्याशियों को छपवाना होगा अपराध का ब्योरा DA Image

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प्रत्याशियों को छपवाना होगा अपराध का ब्योरा

इस बार का लोकसभा चुनाव आपराधिक चरित्र के प्रत्याशियों और उनके दलों के लिए भारी साबित होने वाला है। आपराधिक इतिहास वाले प्रत्याशियों और उनके दलों को नामांकन से लेकर चुनाव प्रचार की समाप्ति के बीच तीन-तीन बार संबंधित क्षेत्र के सर्वाधिक लोकप्रिय अखबारों में विज्ञापन छपवाकर जनता को इसकी जानकारी देनी होगी। उसमें यह स्पष्ट अंकित रहेगा संबंधित प्रत्याशी पर कौन-कौन से और कितने केस दर्ज हैं। उपायुक्त अमित कुमार ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नामांकन के साथ जो फार्म 26 जमा किया जाता है, उसमें भी बोल्ड अक्षरों में अपराध की जानकारी देनी होगी। दरअसल, निर्वाचन आयोग ने 10 अक्तूबर 2018 को आदेश जारी किया था। उसने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पूर्व में जारी आदेश के आलोक में दिया था। डीसी ने कहा कि वे फिलहाल इस आदेश का अध्ययन कर रहे हैं। व्यवहारकुशल रहें ताकि पक्षपात का आरोप नहीं लगे: राज्य के अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनय कुमार चौबे और मनीष रंजन ने इसी विषय पर राज्य के पूर्वी सिंहभूम सहित 12 जिलों के उपायुक्तों व संबंधित अधिकारियों के साथ शनिवार को वीडियो कांफ्रेंस कर जरूरी निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव में नामांकन की तैयारियों को लेकर भी जानकारी ली। उन्होंने सभी उपायुक्त को निर्देश दिया कि वे नामांकन के दौरान व्यवहारकुशलता का परिचय दें, ताकि उन पर पक्षपात का आरोप नहीं लगे। उन्होंने निर्देश दिया कि चुनाव आयोग के निर्देश का पूर्णत: पालन सुनिश्चित करें। नामांकन की वीडियोग्राफी भी कराएं और सभी जरूरी निर्देशों को ध्यान में रखें।

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