
सांड़ों के हमले में कई लोगों की जान गई, फिर भी नहीं जागा प्रशासन
संक्षेप: शहर में सांड़ों का आतंक बढ़ता जा रहा है। डिमना रोड पर एक महिला की मौत और बागुननगर में दंपती पर हमले से स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश है। प्रशासन ने सांड़ों को पकड़ने का कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। लोग खुद की सुरक्षा के लिए मजबूर हैं।
शहर में सांड़ों का आतंक जानलेवा बन गया है। डिमना रोड के शंकोसाई में सांड़ के हमले में महिला की मौत से एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई। इसके बाद रविवार को बागुननगर में दंपती पर हमले में महिला की कलाई टूट गई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह सांड़ को भगाया तो दंपती की जान बच पाई। लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। आए दिन सांड़ों के हमले से लोग घायल होते हैं, पर प्रशासन का ध्यान केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है। अगर डिमना रोड में पहले ही दिन 15 लोगों को घायल करने के बाद सांड़ को पकड़ लिया गया होता तो इसके अगले दिन महिला की मौत नहीं होती।

वहीं, महिला की मौत के बाद प्रशासन कदम उठाता तो रविवार को दंपती पर हमला नहीं होता। वर्ष 2023 में दो लोगों की हो गई थी मौत मार्च 2023 में साकची में दो लोगों की जान सांड़ के हमले में चली गई थी। तब भी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की घोषणा की थी, पर कुछ नहीं हुआ। एक साल से अधिक बीतने के बाद भी न तो किसी ठोस नियंत्रण योजना का क्रियान्वयन हुआ, न ही शहरी क्षेत्रों में नियमित निगरानी की व्यवस्था। रविवार की घटना के बाद उपायुक्त ने घोषणा की कि सभी सांड़ों को बेहोश कर गौशाला भेजा जाएगा। हालांकि इस घोषणा पर कब अमल होता है, यह देखना बाकी है। लोगों में भय और आक्रोश शंकोसाई की इस घटना के बाद लोगों में भय और आक्रोश दोनों है। लोगों का कहना है कि हम रोज घर से निकलते हैं तो डर लगता है कि कहीं अगला निशाना हम न बन जाएं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार जेएनएसी, मानगो नगर निगम और जुगसलाई नगरपालिका को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ सर्वे की बात कही जाती है। लोगों को खुद की सुरक्षा करनी होती है वास्तविकता यह है कि अबतक केवल जेएनएसी इलाके में सांड़ों की गिनती और पकड़ने का सर्वे हुआ है, जबकि मानगो और जुगसलाई में न तो सर्वे शुरू हुआ है, न ही किसी तरह की रोकथाम व्यवस्था दिखती है। इस बीच हर नए हमले के साथ आमलोग अपनी सुरक्षा खुद करने को मजबूर हैं। यह स्थिति केवल एक हादसे की नहीं, बल्कि लापरवाही की पराकाष्ठा है, जहां प्रशासनिक उदासीनता ने नागरिकों की सुरक्षा को भाग्य भरोसे छोड़ दिया है। सांड़ों और आवारा कुत्तों से हाहाकार, प्रशासन के वादे अबतक अधूरे सांड़ों और आवारा कुत्तों से लगातार लोग घायल हो रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को कोई मतलब नहीं है। हर साल सांड़ के हमले में दर्जनों लोग घायल होते हैं, वहीं आवारा कुत्तों के काटने से सालभर में एक हजार से अधिक लोग अस्पताल पहुंचते हैं। मार्च 2023 में साकची में सांड़ के हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी। हाल ही में हुई शंकोसाई की घटना में एक महिला की जान चली गई, जबकि 15 से अधिक लोग एक ही दिन में घायल हो गए। इसके बावजूद न तो सांड़ों को पकड़ने का अभियान शुरू हुआ और न ही कुत्तों की नसबंदी की कार्रवाई तेज हुई।

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