हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने वाले ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की। यह मांग कई वर्षों से की जा रही है, और झारखंड में हो भाषा को द्वितीय राज्यभाषा का दर्जा भी प्राप्त है।

दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमेटी के 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने जनजातीय हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर मांगपत्र सौंपा। इससे पहले वर्ष 2023 में भी इसी मुद्दे पर राष्ट्रपति को मांगपत्र सौंपा गया था। राष्ट्रीय अध्यक्ष रामराय मुन्दुईया ने बताया कि देशभर में 50 लाख से अधिक लोग अपने दैनिक जीवन में हो भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से राज्य और केंद्र सरकार से अनुरोध किया जा रहा है कि हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में आश्वासन दिया था। झारखंड और ओडिशा सरकार भी अनुशंसा पत्र भारत सरकार को भेज चुकी हैं। झारखंड में हो भाषा को द्वितीय राज्यभाषा का दर्जा प्राप्त है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुरा बिरुली ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी बड़ी जनजातीय आबादी अपनी मातृभाषा की संवैधानिक मान्यता से वंचित है, जबकि कई कम बोलने वाली भाषाओं को पहले ही आठवीं अनुसूची में स्थान मिल चुका है। प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय अध्यक्ष रामराय मुन्दुईया, कार्यकारी अध्यक्ष सुरा बिरुली, बाजू चंद्र सिरका, गिरीश चंद्र हेम्ब्रम, शांति सिदु, बसंत बुडीउली, फूलमती सिरका, जगरनाथ केराई, खिरोद हेम्ब्रम, गोपी लागुरी, गोमिया ओमंग और निकिता बिरुली शामिल थे।

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