संतान की रक्षा के लिए माताएं कल रखेंगी अहोई अष्टमी का व्रत
अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर 13 अक्तूबर को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए उपवास रखती हैं। इस बार शुभ योग बन रहे हैं, जिससे व्रत का फल दोगुना...

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उनकी रक्षा और तरक्की के लिए अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्तूबर को रखेंगी। इस वर्ष अहोई अष्टमी पर बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा ह, जो बहुत ही शुभ रहने वाला है। ज्योतिषाचार्य संतोष त्रिपाठी ने बताया कि इस बार अहोई अष्टमी पर शुभ सहयोग बना रहा है, जो बहुत फलदायी है। पंचांग के मुताबिक, अहोई अष्टमी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को है।
इस बार यह तिथि 13 अक्तूबर की देर रात 12.24 बजे से शुरू होगी। इसका समापन 14 अक्तूबर को सुबह 11.09 बजे है। उन्होंने बताया कि इस बार अहोई अष्टमी पर चार शुभ योग बन रहे हैं। उस दिन रवि योग, परिघ योग, शिव योग और पुनर्वसु नक्षत्र है। इसलिए इस दिन व्रत रखकर पूजा-पाठ का महत्व और बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस योग में रखे गए व्रत का साधक को दोगुना फल मिलता है। अहोई अष्टमी को शाम के समय में तारों को देखकर पारण किया जाता है। इस बार अहोई अष्टमी पर तारों को देखने का विशेष महत्व है। अहोई अष्टमी पर तारों को देखने का शुभ मुहूर्त शाम 6.17 बजे है। शिव परिवार की करेंगी पूजा अहोई अष्टमी पर पूरे शिव परिवार सदस्य की पूजा करनी चाहिए। अहोई अष्टमी पर भगवान शिव और माता पार्वती के साथ भगवान कार्तिक और गणेश जी की भी पूजा करनी चाहिए। अहोई अष्टमी की कथा सुनते समय सात प्रकार के अनाज को हथेली पर रखना चाहिए। इसके बाद गाय को खिलाना चाहिए।
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