
हिन्दुस्तान असर : साकची, बिष्टूपुर समेत शहर की सड़कों से हटाए गए आवारा पशु
जमशेदपुर में बढ़ते आवारा सांड़ों, मवेशियों और कुत्तों के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने अभियान शुरू किया है। 12 से 18 नवंबर के बीच उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई करते हुए, जेएनएसी और जुस्को ने बड़े पैमाने पर आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया। यह मुहिम शहर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे भी जारी रहेगी।
शहर की सड़कों पर लगातार बढ़ रहे आवारा सांड़ों, मवेशियों और कुत्तों के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। हिन्दुस्तान की ओर से 12 से 18 नवंबर तक चलाए गए विशेष अभियान में उठाए गए मुद्दों पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार से जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी (जेएनएसी) और जुस्को ने संयुक्त रूप से बड़े पैमाने पर आवारा पशु पकड़ो अभियान शुरू किया। शहर के प्रमुख इलाकों साकची, बिष्टूपुर, सोनारी, कदमा, मानगो और जुगसलाई में सुबह से ही टीमें सक्रिय रहीं। अभियान में बड़ी संख्या में गायों, सांडों और अन्य पशुओं को पकड़ा गया और उन्हें सुरक्षित रूप से गौशालाओं में स्थानांतरित किया गया।
प्रशासन का कहना है कि यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी, ताकि शहर की सड़कें सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त रह सकें। इस दौरान पशुओं को पकड़ने में विशेष सावधानी बरती गई। सबसे पहले प्रशिक्षित टीमों ने रस्सी की मदद से मवेशियों को नियंत्रित किया, जिसके बाद उन्हें ट्रैंक्विलाइज़र यानी बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया। यह दवा 60 से 90 मिनट तक प्रभावी रहती है, जिससे पशु शांत हो जाते हैं। इसके बाद बेहोश पशुओं को जेसीबी की मदद से बड़े ट्रकों पर लादकर गौशालाओं तक पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में किसी भी पशु को चोट न लगे, इसका विशेष ध्यान रखा गया। तीन वर्षों में तीन मौतें, दर्जनों घायल जिला पशुपालन विभाग के अधिकारी डॉ. तुषार मंडल ने कहा कि शहर में अनियंत्रित तरीके से घूमने वाले पशुओं के कारण कई गंभीर हादसे हुए हैं। पिछले तीन वर्षों में तीन लोगों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हाल ही में मानगो क्षेत्र में एक सांड़ के हमले में महिला की मौत और 15 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना ने शहर को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान अत्यंत आवश्यक था। पशु कल्याण नियमों का हो रहा पालन भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ज्योतेंद्र नारायण ने स्पष्ट किया कि पूरे अभियान के दौरान पशु कल्याण से जुड़े सभी नियमों का पालन किया जा रहा है। किसी पशु को अनावश्यक चोट या क्षति न पहुंचे, इसके लिए विशेषज्ञ टीम मौजूद है। उन्होंने पशुपालकों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने मवेशियों को सड़कों पर न छोड़ें। यदि पशुपालक अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाते, तो दुर्घटनाएं बढ़ेंगी और उनपर कार्रवाई भी की जाएगी।

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