इमरजेंसी ड्यूटी से गैरहाजिर रहे डॉक्टर तो होगी कार्रवाई
एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी में जिनकी ड्यूटी होगी, उन्हें वहां उपस्थित रहना होगा। ड्यूटी पर नहीं पाए जाने पर कार्रवाई होगी।

एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी में जिनकी ड्यूटी होगी, उन्हें वहां उपस्थित रहना होगा। ड्यूटी पर नहीं पाए जाने पर कार्रवाई होगी। ये बातें अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने मंगलवार को सर्जरी एवं हड्डी रोग विभाग के विभागाध्यक्ष एवं डॉक्टरों की बैठक में कही। जानकारी हो कि मुख्य इमरजेंसी में सबसे अधिक मरीज मेडिसीन, सर्जरी और हड्डी रोग विभाग के आते हैं। अधीक्षक ने कहा कि इमरजेंसी में मेडिकल ऑफिसर, असिस्टेंट प्रोफेसर या जिन सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी पड़ती है, उन्हें हर हाल में इमरजेंसी में सामने उपस्थित रहना होगा। ऐसा नहीं कि कहीं अन्य कमरे में जाकर सो गए या कहीं चले गए।
क्योंकि इमरजेंसी ड्यूटी सिर्फ जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दी जाती है। कहीं वार्ड में अचानक जरूरत पड़ गई तो वहां से होकर तुरंत इमरजेंसी में वापस लौट आएंगे। प्राचार्य, अधीक्षक या वरिष्ठ पदाधिकारी औचक निरीक्षण भी करेंगे। विभागाध्यक्ष भी निरीक्षण के दौरान अपने ड्यूटी डॉक्टरों की उपस्थिति की जांच कर सकते हैं। उपस्थित नहीं मिलने पर कार्रवाई होगी। वहीं, अस्पताल में हंगामा होने पर उस समय के सीनियर ड्यूटी डॉक्टर की होगी।बैठक में विभागाध्यक्षों को कहा गया कि सीनियर डॉक्टर जूनियर डॉक्टर पर काम को सौंप देते हैं और खुद उससे छुटकारा पा लेते हैं, लेकिन इस तरह की प्रवृत्ति समाप्त करें। सीनियर डॉक्टरों को जिम्मेवारी लेनी होगी। इस तरह की लापरवाही की घटना पर सीनियर डॉक्टरों या विभागाध्यक्षों से पूछा जाएगा। अधीक्षक ने कहा कि लगातार हो रहे हंगामा का एक कारण यह भी है कि मरीज या उसके परिजनों को डॉक्टर ठीक से बात नहीं करते या समझाते नहीं हैं। यदि मरीज की समस्या या परिजनों की बात सुनकर उन्हें उसके बारे में ठीक से समझाया जाए तो हंगामा से बचा जा सकता है। मरीजों एवं परिजनों की परेशानी पर वे उग्र हो भी जाते हैं तो डॉक्टरों को अपना धैर्य नहीं खोना है, बल्कि ठीक से समझाकर मामले को शांत करना है।
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