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Hindi News झारखंड जमशेदपुरशतरंज के 64 दिव्यांग खिलाड़ी राष्ट्रीय खिताब जीतने को तैयार

शतरंज के 64 दिव्यांग खिलाड़ी राष्ट्रीय खिताब जीतने को तैयार

शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए शतरंज के 64 महारथी जमशेदपुर में राष्ट्रीय खिताब के लिए मोर्चा संभालने को तैयार हैं।शारीरिक रूप से दिव्यांगों के लिए शतरंज महासंघ के तत्वावधान में चौथी अखिल भारतीय फिड

शतरंज के 64 दिव्यांग खिलाड़ी राष्ट्रीय खिताब जीतने को तैयार
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Newswrapहिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरTue, 25 Jun 2024 12:06 AM
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शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए शतरंज के 64 महारथी जमशेदपुर में राष्ट्रीय खिताब के लिए मोर्चा संभालने को तैयार हैं। शारीरिक रूप से दिव्यांगों के लिए शतरंज महासंघ के तत्वावधान में चौथी अखिल भारतीय फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता का आगाज सोमवार को जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुआ। यह प्रतियोगिता 28 जून तक चलेगी।
देश भर से आए इन 64 खिलाड़ियों में जोश और जुनून कूट-कूट कर भरा है। सभी की निगाहें 25 हजार के विजेता पुरस्कार और राष्ट्रीय खिताब पर टिकी हैं। प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में पूर्व अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी प्रवीण थिप्से और टाटा स्टील कॉरपोरेट सर्विसेज के उपाध्यक्ष चाणक्य चौधरी ने अपनी उपस्थिति से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। मंगलवार से मुख्य ड्रा के साथ प्रतियोगिता शुरू होगी और नौ राउंड तक चलेगी। पहले दिन तीन राउंड और उसके बाद तीन दिन तक प्रतिदिन 2-2 राउंड खेले जाएंगे। खिलाड़ियों को लोकोमोटर डिसेबिलिटीज, मूक बधिर, व्हीलचेयर, अनरेटेड, महिला, अंडर-19 जूनियर ओपन और गर्ल्स जैसी विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

विकसित देशों से कम होती हैं प्रतियोगिताएं : थिप्से

जमशेदपुर। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रवीण थिप्से ने कहा कि विकसित देशों की तुलना में अपने देश में दिव्यांगों के लिए चेस की प्रतियोगिताएं काफी कम होती हैं। प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ानी होगी, ताकि अधिक से अधिक प्रतिभाओं को पहचाना जा सके। पत्रकारों से बातचीत में थिप्से ने कहा कि अपने देश में चेस में भी दिव्यांग बच्चों को आगे बढ़ाने की शुरुआत हो चुकी है। इससे बच्चों को करियर का विकल्प भी बन सकता है। चेस टूर्नामेंट में आर्बिटर और नौकरी जैसे विकल्प भी मिल सकते हैं। टूर्नामेंट को सामान्य खिलाड़ियों को भी देखना चाहिए। दिव्यांग बच्चे अपने तकलीफ के साथ कैसे धैर्य रखते हैं और वे खेलते हैं।

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