सिखों का इतिहास और विरासत गौरवमयी : मथारू
रामगढ़िया सभा द्वारा बिष्टूपुर गुरुद्वारे में महान सिख जरनैल जस्सा सिंह रामगढ़िया की 303वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर श्री अखंड पाठ का भोग डाला गया और कीर्तन का आयोजन हुआ। झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू ने सिखों के गौरवपूर्ण इतिहास पर प्रकाश डाला।

सिखों की सामाजिक संस्था रामगढ़िया सभा की ओर से बिष्टूपुर गुरुद्वारा में महान सिख जरनैल जस्सा सिंह रामगढ़िया की 303वीं जयंती मनाई गई। श्री अखंड पाठ का भोग डाला गया। कीर्तन और अरदास के बाद गुरु का लंगर का आयोजन हुआ। मौके पर विशेष तौर पर पहुंचे झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष सरदार ज्योति सिंह मथारू ने कहा कि हमारा गौरवपूर्ण इतिहास और विरासत है। जस्सा सिंह रामगढ़िया के नेतृत्व में 11 मार्च 1783 में मुगल बादशाह आलम को हराकर दिल्ली फतह किया गया और वहां खालसा निशान फहराया गया। सिखों ने अब्दाली के कब्जे से महिलाओं को छुड़ाया और आक्रांताओं को अफगानिस्तान के पार खदेड़ा।
इसके साथ ही उन्होंने सरकारी योजनाओं में सिख समाज की भागीदारी के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इसमें ट्रस्टी शैलेंद्र सिंह, प्रधान केपीएस बंसल, संतोख सिंह संधू, सीजीपीसी के पूर्व प्रधान गुरमुख सिंह मुखे, बाबा विक्रम सिंह आदि ने इतिहास की जानकारी दी।सभा की ओर से प्रधान केपीएस बंसल ने ज्योति सिंह मथारू को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मौके पर ट्रस्टी अमरदीप सिंह, पूर्व ट्रस्टी जसवीर सिंह संधू, उपाध्यक्ष सतविंदर सिंह बब्बू उपस्थित रहे। कांग्रेस जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह सहित समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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