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पर्वतारोहियों को ओवरटेक कर एवरेस्ट पर पहुंचे थे राजेंद्र सिंह पाल

पर्वतारोहियों को ओवरटेक कर एवरेस्ट पर पहुंचे थे राजेंद्र सिंह पाल

गत 23 मई को बिष्टूपुर स्थित एसएनटीआइ प्रेक्षागृह में भारत की पहली महिला एवरेस्टर बचेंद्री पाल की विदाई समारोह में उनके छोटे भाई राजेंद्र सिंह पाल ने भी एवरेस्ट के रास्ते में लगनेवाली भीड़ का जिक्र किया था।

एवरेस्टर राजेंद्र सिंह पाल से जब उनके एवरेस्ट अभियान के बारे में पूछा गया, तो उनका कहना था कि कैंप-4 के आगे ऑक्सीजन की कमी के कारण उनके पांव ठिठक गए थे। कुछ देर बाद शेरपा ने उनके सिलिंडर के रेगुलेटर को ठीक किया, तब जाकर उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिली फिर वे आगे बढ़े।

उन्होंने बताया कि सिलिंडर ठीक होने के बाद जब उन्होंने आगे देखा तो पर्वतारोहियों की लंबी कतार नजर आई। एक पल के लिए ऐसा लगा कि शायद वे आज एवरेस्ट तक नहीं जा पाएंगे। इसके बाद उन्होंने ओवरटेक करने का फैसला किया। इसके कारण कुछ दूर तक उन्हें बिना रस्सी के ही आगे बढ़ना पड़ा, लेकिन वे काफी जद्दोजहद एवं अपनी मजबूत ट्रेनिंग के दम पर अंतत: 26 मई 2012 को प्रात: समय एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में सफल हुए।

नियंत्रित करनी होगी भीड़ : यदि पर्वतारोहियों को मौत से बचाना है, तो भीड़ को नियंत्रित करना होगा। यह तभी संभव है, जब नेपाल सरकार इस गंभीर समस्या पर ध्यान देगी। वैसे जाननेवाली बात यह है कि वर्तमान में एक पर्वतारोही को एवरेस्ट पर जाने के लिए लगभग 25 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। एवरेस्ट नेपाल के लिए कमाई का जरिया बन चुका है, ऐसे में पर्वतारोहियों की भीड़ को नियंत्रित करने का फैसला नेपाल सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

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