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एवरेस्ट के रास्ते में पर्वतारोहियों की भीड़, तीन महीने में 15 की मौत

हिमालय की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर जाने को लेकर अब पर्वतारोहियों की इतनी भीड़ बढ़ गई है कि वह जानलेवा साबित हो रहा है। खबर है कि पिछले तीन महीने में सात भारतीय समेत कुल 15 पर्वतारोही एवरेस्ट के रास्ते में जान गंवा चुके हैं।

एवरेस्ट पर जाने के दो रास्ते : 29028 फीट ऊंची एवरेस्ट की चोटी पर जाने के दो रास्ते हैं। एक नेपाल से होकर और दूसरा तिब्बत के रास्ते। तिब्बत के रास्ते पर चीन का कब्जा होने के कारण अधिकांश पर्वतारोही नेपाल के रास्ते ही एवरेस्ट पर जाते हैं।

एडमंड हिलेरी और नार्वे तेनजिंग एवरेस्ट पर जानेवाले पहले पर्वतारोही थे। इन दोनों ने 1953 में एवरेस्ट फतह किया था। इसके बाद से एवरेस्ट साहस का ऐसा प्रतिबिंब बन गया, जिस पर चढ़कर ख्याति हासिल करने के लिए आज भी दुनियाभर के पर्वतारोही कतारों में खड़े हैं। नेपाल में एवरेस्ट सागरमाथा के नाम से जाना जाता है।

पर्वतारोहियों की पसंद नेपाल क्यों : दरअसल चीन सरकार द्वारा बहुत कम पर्वतारोहियों को एवरेस्ट पर जाने की इजाजत दी जाती है, जबकि नेपाल सरकार ने एवरेस्ट को कमाई का जरिया बना लिया है।

नेपाल सरकार न तो पर्वतारोहियों की उम्र देखती है और न ही फिटनेस, जो कोई उनकी शरण में पहुंचता है, उसे एवरेस्ट पर जाने की अनुमति दे दी जाती है। यही कारण है कि एवेरस्ट पर जाने को इच्छुक पर्वतारोही नेपाल का ही रास्ता चुनते हैं।

मौत की वजह : एवरेस्ट पर जाने के लिए मार्च से मई तक का महीना अनुकूल माना जाता है। इस समय दुनिया भर के पर्वतारोही एवरेस्ट फतह के लिए निकलते हैं।

एवरेस्ट के रास्ते में कैंप-4 आता है और उसके आगे के रास्ते को डेथ जोन के नाम से जाना जाता है। पर्वतारोही डेथ जोन में तभी प्रवेश करते हैं, जब मौसम विभाग से हरी झंडी मिलती है।

23 मई को टाटा के एवरेस्टरों ने भी एसएनटीआइ प्रेक्षागृह में इस बात का जिक्र किया था कि कैंप-4 में बड़ी संख्या में पर्वतारोही मौजूद होते हैं, जो मौसम विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद एवरेस्ट की ओर चल पड़ते हैं।

डेथ जोन में सकरा रास्ता : कैंप-4 से आगे पर्वतारोहियों को एक ही रस्सी के सहारे सकरा रास्ता से गुजरना पड़ता है। ऐसे में जब पर्वतारोहियों की संख्या अधिक होती है, रास्ते में घंटे भर रूकना भी पड़ जाता है और यही ठहराव उनकी मौत का कारण बन जाता है।

ऑक्सीजन की कमी : पर्वतारोही तो अपने हिसाब से ऑक्सीजन लेकर चलते ही हैं, लेकिन जब उन्हें जरूरत से ज्यादा समय कहीं रूकना पड़ता है, तो ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जो उनकी मौत का कारण बन जाता है।

गुरूवार को तीन की मौत : खबर है कि पिछले 23 मई को मौसम विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद एक साथ दो सौ से भी अधिक पर्वतारोही कैंप-4 से एवरेस्ट के लिए निकल पड़े। ऐसे में डेथ जोन में जाम लग गया, जहां पर्वतारोहियों को दो घंटे तक रूकना पड़ गया। अत्यधिक ठहराव और ऑक्सीजन की कमी के कारण तीन पर्वतारोहियों ने दम तोड़ दिया। मरनेवालों में दो भारतीय और एक ऑस्ट्रेलियाई पर्वतारोही थे।

खबर है कि पिछले बुधवार से लेकर शनिवार तक शायद ही कोई ऐसा दिन बीता है, जब एवरेस्ट के रास्ते में किसी पर्वतारोही की मौत नहीं हुई हो।

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