
'जयपुर की रानी की सुंदरता से ईर्ष्या करती थीं इंदिरा गांधी, भेज दिया था जेल', BJP सांसद निशिकांत दुबे का आरोप
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि साल 1962 में हुए चीन के साथ युद्ध और 1971 में हुए पाकिस्तान के साथ युद्ध में अपना योगदान देने वाले जयपुर राजघराने के कर्नल भवानी सिंह और उनकी मां को जेल भेज दिया था।
झारखंड की गोड्डा सीट से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी पर बड़ा आरोप लगाया है। दुबे ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि साल 1962 में हुए चीन के साथ युद्ध और 1971 में हुए पाकिस्तान के साथ युद्ध में अपना योगदान देने वाले जयपुर राजघराने के कर्नल भवानी सिंह और उनकी मां को जेल भेज दिया था। दुबे ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इंदिरा गांधी कर्नल भवानी की मां गायत्री देवी की सुंदरता से ईर्ष्या करती थीं।

शुक्रवार को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “गांधी परिवार के लिए सुंदरता भी खतरनाक हो सकती है। क्या आपको पता है कि इंदिरा गांधी जी जयपुर राजघराने की रानी गायत्री देवी जी की सुंदरता से ईर्ष्या करती थीं। नतीजा महारानी गायत्री देवी जी और उनके पुत्र कर्नल भवानी सिंह जी जिन्होंने 1962 का युद्ध लड़ा,1971 युद्ध में बड़ा योगदान दिया दोनों को 1975 में कांग्रेस पार्टी ने नशा तस्करी,हवाला तस्करी और हथियार तस्करी का केस लगाकर जेल भेजा।” दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को टैग करते हुए लिखा, “राहुल गांधी जी यह आपके पार्टी का संविधान है,कोलंबिया में यह बताना चाहिए।”
इससे पहले, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने रविवार को पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या में कांग्रेस की भूमिका का आरोप लगाया। निशिकांत दुबे ने कहा कि इसे आयात लाइसेंस मामले में कथित रूप से भ्रष्टाचार छिपाने के लिए किया गया था। दिसंबर 1974 में संसद में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का एक दस्तावेज साझा करते हुए, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर संदेह जताया और एलएन मिश्रा की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाते हुए लिखा, "क्या कांग्रेस पार्टी ने अपने कमीशनखोरी के गोरखधंधे को छिपाने के लिए तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या की साजिश रची थी? भारत सरकार ने 1972-73 में एक फर्जी आयात-निर्यात लाइसेंस जारी किया था। ललित नारायण मिश्रा विदेश व्यापार मंत्री थे और पैसों का लेन-देन शुरू हुआ। उस समय, 1 लाख 20 हज़ार प्रति माह?"





