अगर कांग्रेस में जरा भी हिम्मत है तो... झारखंड में ‘इंडिया’ गठबंधन के विवाद में BJP सांसद भी कूदे

एएनआई, देवघर
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झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन के बीच चल रही खींचतान में अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी कूद पड़े हैं। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उसमें जरा सा भी हिम्मत है तो वह सत्ताधारी गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले ले।

अगर कांग्रेस में जरा भी हिम्मत है तो... झारखंड में ‘इंडिया’ गठबंधन के विवाद में BJP सांसद भी कूदे

झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद में गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी कूद पड़े हैं। दुबे ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी कि अगर उसमें हिम्मत है तो वह सत्ताधारी गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले ले। दुबे ने आरोप लगाया कि राज्य में कांग्रेस का नेतृत्व राजनीतिक सिद्धांतों के बजाय पैसों के लालच से प्रेरित है। उन्होंने पार्टी के राज्य प्रभारी पर सीधे तौर पर निशाना साधा।

समर्थन वापस ले लेना चाहिए

एएनआई से बात करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि अगर कांग्रेस में थोड़ी भी हिम्मत है तो उसे अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए। दुबे ने कहा कि कांग्रेस को पैसा चाहिए। हमारे विधायक कह रहे हैं कि राज्य के कांग्रेस प्रभारी के. राजू पैसों के लिए बिक गए। राज्यसभा चुनावों में क्रॉस-वोटिंग की अटकलों के बीच कांग्रेस, राजद और CPI(ML) लिबरेशन ने अपने-अपने विधायकों के व्यवहार को लेकर अलग-अलग दावे किए।

अंसारी ने कहा- धोखा हुआ

इससे पहले, झारखंड के मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने आरोप लगाया था कि गठबंधन सहयोगी आरजेडी और CPI(ML) लिबरेशन ने वोटिंग के दौरान गठबंधन के साथ धोखा किया। उन्होंने दावा किया कि हमने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पूरा समर्थन किया, फिर भी उन्होंने अहम मौके पर हमें धोखा दिया। अंसारी ने कहा कि अपने सहयोगियों की पीठ में छुरा घोंपकर वह बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।

माले बोली- तय प्लान के मुताबिक ही वोट दिया

हालांकि, CPI(ML) लिबरेशन के जनरल सेक्रेटरी दीपांकर भट्टाचार्य ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायकों ने गठबंधन के तय प्लान के मुताबिक ही वोट दिया। कहा कि झारखंड राज्यसभा वोटिंग को लेकर लगाई जा रही अटकलों के बारे में हम पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकते हैं कि हमारे दो विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के लिए वोट किया।

कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए

इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने भी गठबंधन की नीति से किसी भी तरह के भटकाव से इनकार किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरजेडी के सभी चार विधायकों ने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस नेतृत्व को कमियों का पता लगाने और संगठनात्मक मुद्दों को सुलझाने के लिए आंतरिक समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जांच करनी चाहिए कि क्या गलत हुआ। मुझे लगता है कि कांग्रेस प्रभारी को आत्ममंथन करना चाहिए। इससे उनके मामले सुलझ जाएंगे।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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