
झारखंड में JMM- BJP अगर मिलकर बनाएंगे सरकार, तो किसे फायदा और किसे नुकसान? समझें
झारखंड में सियासी बदलाव की अटकलें चल रही हैं। इस दौरान बीजेपी और जेएमएम की तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है। लेकिन अगर ऐसा होता है तो दोनों पार्टियों को नुकसान और फायदे दोनों होंगे।
झारखंड में सियासी अटकलबाजियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कहा जा रहा है कि जेएमएम और बीजेपी के बीच अंदरखाने अब भी बातचीत चल रही है। ये बातचीत झारखंड में मिलकर सरकार बनाने की भी हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो झारखंड सियासी समीकरण 360 डिग्री बदल जाएगा। बीजेपी और जेएमएम दोनों ही पार्टियों के इसके फायदे और नुकसान दोनों ही होंगे। आइए समझते हैं बीजेपी को और जेएमएम को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं।
JMM को क्या फायदा और क्या नुकसान
चुनावों के दौरान किए गए बड़े-बड़े वादे राज्य की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। सीएम हेमंत सोरेन की सरकार के लिए मईयां सम्मान योजना फायदेमंद तो साबित हुई, लेकिन अब इसके पैसों की व्यवस्था सरकार को भारी पड़ रही है। राज्य में विकास के लिए जरूरी पैसों का इस्तेमाल मईयां सम्मान जैसी योजनाओं में खर्च हो रहे हैं। ऐसे में अगर हेमंत सोरेन बीजेपी के साथ हाथ मिलाते हैं, तो उनको केंद्र से मिलने वाले फंड में बढ़ोत्तरी हो सकती है और आर्थिक बोझ तले दबे राज्य को राहत मिल सकती है। इसके अलावा केंद्र में भी हेमंत सोरेन कोई पद मांग सकते हैं। हालांकि, बीजेपी के साथ जाना जेएमएम और हेमंत सोरेन के लिए सिर्फ फायदे का ही सौदा नहीं है। इसके कुछ नुकसान भी हैं। जैसे प्रदेश का मुस्लिम वोट और ईसाई वोट एकमुश्त जेएमएम और उसके गठबंधन को पड़ता है। आदिवासी वोट भी जेएमएम की तरफ ज्यादा रहता है। ऐसे में बीजेपी के साथ जाने पर इन वोटों का छिटकना तय है। इसके अलावा जेएमएम की छवि को भी नुकसान हो सकता है।
बीजेपी को क्या फायदा और क्या नुकसान
पिछले साल झारखंड में विधानसभा चुनाव हुए। इन चुनावों में तमाम बड़े वादों के बावजूद बीजेपी बहुत पीछे रह गई और जेएमएम ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली। इन चुनावों के बाद हाल ही में घाटशिला विधासनभा उपचुनाव हुआ। इन चुनावों में भी जेएमएम ने बड़ी जीत दर्ज की। इसके बाद बीजेपी को लगने लगा कि झारखंड में वापसी करना आसान नहीं है। इस दौरान यह बात भी सामने आई कि प्रदेश के कई बड़े बीजेपी के नेता भी जेएमएम में जाने का मन बना चुके हैं। ऐसे में अगर बीजेपी जेएमएम के साथ मिलकर सरकार बनाती है, तो उसके कई नेता जो जेएमएम में जाने का मन बना चुके हैं, नहीं जाएंगे। इसके साथ ही एक और राज्य में बीजेपी की सरकार बन सकती है। हालांकि, जेएमएम के साथ जाना बीजेपी के लिए गले की हड्डी भी बन सकता है। जेएमएम के साथ जाने पर सवाल उठेगा कि कल तक जिसे आप भ्रष्टाचारी बता रहे थे, आज उसके साथ सरकार कैसे बना सकते हैं।
हालांकि,इस मामले पर अभी तक ना जेएमएम और ना ही बीजेपी की तरफ से कोई ऐसी प्रतिक्रिया आई है, जो यह संकेत भी करे कि दोनों मिलकर सरकार बनानने जा रहे हैं।





