
पत्नी की एक्स बॉयफ्रेंड के साथ तस्वीरों को लेकर प्रताड़ित कर रहा था पति, हाई कोर्ट ने दे दिया तलाक
झारखंड हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए एक महिला को तलाक की अनुमति दी है। आरोप है कि उसके पति और ससुराल वाले शादी से पहले की कुछ तस्वीरों को लेकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
झारखंड हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए एक महिला को तलाक की अनुमति दी है। आरोप है कि उसके पति और ससुराल वाले शादी से पहले की कुछ तस्वीरों को लेकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। कोर्ट ने पाया कि पति ने पत्नी की जानकारी के बिना उसके गूगल ड्राइव (Google Drive) से कुछ निजी तस्वीरें निकालीं और उन्हें अपने परिवार के सदस्यों को दिखा दिया। इसके आधार पर ससुराल वाले उसे लगातार अपमानित कर रहे थे, जिसे अदालत ने पत्नी का चरित्र हननकरार दिया है। य तस्वीरें शादी से पहले की महिला और उसके पार्टनर की थी।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शादी जैसे रिश्ते की नींव आपसी विश्वास और सम्मान पर टिकी होती है, और यदि यह विश्वास एक बार टूट जाए, तो उसे वापस जोड़ना मुश्किल होता है। जजों ने कहा कि क्रूरता केवल शारीरिक नहीं होती, बल्कि मानसिक भी हो सकती है। पति का अपनी पत्नी के अतीत को हथियार बनाकर उसे नीचा दिखाना और उसकी गोपनीयता का उल्लंघन करना इतनी गंभीर मानसिक क्रूरता है कि उसके बाद दोनों का साथ रहना असंभव हो जाता है।
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गौरतलब है कि इससे पहले एक फैमिली कोर्ट ने महिला की तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी, जिसे हाई कोर्ट ने अब पलट दिया है। कोर्ट ने माना कि शादी के अगले ही दिन पत्नी का फोन चेक करना, उसकी निजी तस्वीरें चोरी करना और फिर उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देना मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत 'क्रूरता' को आधार मानते हुए महिला के पक्ष में तलाक का फैसला सुनाया।
क्या है मामला
महिला का आरोप था कि शादी के एक दिन बाद, महिला के सोते समय उसके पति ने उसका मोबाइल फोन चेक किया था। इससे उसे आपत्तिजनक तस्वीरें मिलीं। इसके बाद पति ने कथित तौर पर उन तस्वीरों को अपने फोन में ट्रांसफर कर लिया और उन्हें सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देने लगा। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसके पति ने उसे प्रताड़ित किया।
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दूसरी ओर, पति ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह पत्नी के पिछले संबंधों के बारे में जानने के बावजूद भी उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने को तैयार था। उसने यह भी कहा कि पत्नी ने उसे अपने पिछले संबंधों के बारे में कभी नहीं बताया था। कोर्ट ने पाया कि पति द्वारा शारीरिक उत्पीड़न के महिला के आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं थे। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि क्रूरता मनोवैज्ञानिक भी हो सकती है।
इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अपीलकर्ता पत्नी के साथ मानसिक क्रूरता की गई है, जिसके कारण उसके लिए अपने पति के साथ रहना लगभग असंभव है।





