हजारीबाग बोले : गंदगी, अंधेरे व दुर्गंध के बीच जीने को मजबूर हैं नौ हजार की आबादी
वार्ड नंबर 26, मानक बगीचा रामनगर में नालियाँ पूरी तरह पैक हैं, जिससे सफाई में समस्या हो रही है। डस्टबिन की कमी और खराब स्ट्रीट लाइट्स से लोग परेशान हैं। मोहल्ले के लोग नगर निगम से समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं। फॉगिंग और चापानलों की मरम्मत की भी आवश्यकता है।
वार्ड नंबर 26, मानक बगीचा रामनगर के कई इलाकों में नालियों को पूरी तरह पैक कर दिया गया है। इसके कारण नालियों में बहने वाला पानी और कचरा साफ नहीं हो पाता है। नाली के ऊपर बने स्लैब को हर कुछ दूरी पर खुला छोड़ना आवश्यक है, ताकि समय-समय पर नालियों की सफाई की जा सके। इस वार्ड में डस्टबिन की व्यवस्था नहीं है। हर कुछ दूरी पर और चौक-चौराहों पर डस्टबिन लगाने की जरूरत है। हिन्दुस्तान के बोले हजारीबाग कार्यक्रम में लोगों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए जल्द समाधान की गुहार लगाई। हजारीबाग। वार्ड नंबर 26 में कानी बाजार, रामनगर और विष्णुपुरी जैसे इलाके शामिल हैं।
इस पूरे क्षेत्र में डस्टबिन की कोई व्यवस्था नहीं है। डस्टबिन नहीं होने के कारण लोग सारा कचरा सड़क के किनारे ही फेंकने को मजबूर हैं। सड़क पर घूमने वाले आवारा जानवर, जैसे कुत्ते और गाय, इस कचरे को और फैला देते हैं, जिससे पूरा इलाका गंदगी से भर जाता है। मोहल्ले के लोग मांग कर रहे हैं कि हर चौक-चौराहे और प्रमुख स्थानों पर डस्टबिन लगाया जाए, ताकि लोग कचरा सड़क पर फेंकने से बचें। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ डस्टबिन लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि नगर निगम को लोगों को यह भी हिदायत देनी चाहिए कि कचरा केवल कचरा गाड़ी या डस्टबिन में ही डालें। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो, तभी जाकर मोहल्ले की सफाई व्यवस्था में सुधार संभव है। इस इलाके की स्ट्रीट लाइट की स्थिति भी बेहद खराब है। स्ट्रीट लाइट दशकों पहले लगाई गई थी, जो अब पूरी तरह खराब हो चुकी है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है और लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी होती है। अंधेरे के कारण दुर्घटना और असामाजिक गतिविधियों का भी खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि नई स्ट्रीट लाइट लगाना अब बेहद जरूरी हो गया है। वार्ड के कई हिस्सों में नालियों को पूरी तरह पैक कर दिया गया है। नालियों के ऊपर बने स्लैब को कहीं भी खुला नहीं छोड़ा गया है, जिससे नालियों की नियमित सफाई संभव नहीं हो पाती। इन नालियों में घरों का गंदा पानी बहने के साथ-साथ गोबर भी डाला जा रहा है। इसके कारण पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। इसी बदबू के बीच लोगों को रोजाना आना-जाना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम को इस पर तत्काल पहल करनी चाहिए और स्लैब को आंशिक रूप से हटाकर नालियों की सफाई करानी चाहिए। वार्ड के कुछ इलाकों में पेवर ब्लॉक नहीं लगाया गया है। कहीं सड़क के एक तरफ पेवर ब्लॉक लगा है, तो दूसरी तरफ नहीं। इससे सड़क अधूरी और असुविधाजनक बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा टेंडर निकालकर काम कराने वाले ठेकेदार आधा-अधूरा काम करके फरार हो जाते हैं। वहीं नगर निगम के इंजीनियर कार्यालय में बैठकर केवल बिल बनाने में लगे रहते हैं और फील्ड में जाकर काम की गुणवत्ता नहीं देखते हैं। वार्ड के कुछ स्थानों पर लगे चापानल भी लंबे समय से खराब पड़े हैं। चापानल खराब रहने के कारण गर्मी के दिनों में पीने के पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये चापानल कई वर्षों से खराब हैं, लेकिन अब तक उनकी मरम्मत नहीं कराई गई है। इनकी मरम्मत किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इस इलाके में फॉगिंग की सुविधा भी नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं पता कि फॉगिंग क्या होती है। फॉगिंग नहीं होने के कारण इलाके में मच्छर और मक्खियों का भारी प्रकोप है। नालियों का गंदा पानी सड़क पर बहने से आवागमन में परेशानी वार्ड नंबर 26 के कई इलाकों में नालियों को पूरी तरह स्लैब से ढंक दिया गया है। स्लैब को कहीं भी खुला नहीं छोड़ा गया है, जिससे नालियों की नियमित सफाई नहीं हो पाती। नालियों में घरों का गंदा पानी और गोबर बहने से लगातार दुर्गंध फैल रही है। बदबू के कारण लोगों का सड़क पर चलना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाली के ऊपर बने स्लैब को हर कुछ दूरी पर खुला छोड़ना चाहिए, ताकि समय-समय पर सफाई हो सके और गंदगी से राहत मिल सके। वार्ड में नहीं है एक भी डस्टबिन सड़क किनारे गंदगी का अंबार वार्ड के कानी बाजार, रामनगर और विष्णुपुरी इलाके में कहीं भी आज तक डस्टबिन नहीं लगाया गया है। मजबूरी में लोग कचरा सड़क के किनारे फेंक देते हैं। इससे आवारा कुत्ते और गाय कचरे को फैला देते हैं, जिससे पूरा इलाका गंदा नजर आता है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर चौक-चौराहे और मोहल्ले में डस्टबिन लगाया जाए। इसके साथ ही लोगों को जागरूक किया जाए कि कचरा सिर्फ डस्टबिन या कचरा गाड़ी में ही डालें। स्ट्रीट लाइट खराब रहने से शाम ढलते ही पसर जाता है अंधेरा वार्ड नंबर 26 में लगी स्ट्रीट लाइट दशकों पुरानी है, जो अब पूरी तरह खराब हो चुकी है। मोहल्ले में शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। अंधेरे के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में दुर्घटना और असामाजिक घटनाओं का खतरा बना रहता है। लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि जल्द से जल्द पुरानी स्ट्रीट लाइट हटाकर उसकी जगह नई लाइट लगाई जाए, ताकि सुरक्षा और आवागमन दोनों बेहतर हो सके। लोगों ने की नियमित फॉगिंग कराने की मांग वार्ड में फॉगिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि उन्हें पता ही नहीं कि फॉगिंग कब होती है। मच्छर और मक्खियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कई जगहों पर चापानल वर्षों से खराब पड़े हैं, जिससे गर्मियों में पानी की समस्या हो जाती है। बिजली के पोल पर पुराने तारों का मकड़ी जैसा जाल बना हुआ है, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। लोगों की मांग है कि फॉगिंग शुरू हो, चापानलों की मरम्मत हो और पुराने तार तुरंत हटाए जाएं। नगर निगम द्वारा सफाई के लिए लाई गई मशीनों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया गया कि झाड़ू लगाने के लिए मंगाई गई मशीनें छह महीने भी नहीं चल सकीं। टेंडर पास कर मशीन मंगाई जाती है। सड़कें भी बदहाल वार्ड के कई हिस्सों में पेवर ब्लॉक अधूरा लगाया गया है। कहीं सड़क के एक तरफ ब्लॉक है, तो दूसरी तरफ नहीं। इससे सड़क बदहाल हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टेंडर मिलने के बाद ठेकेदार आधा-अधूरा काम कर फरार हो जाते हैं। वहीं नगर निगम के इंजीनियर फील्ड में जाकर काम की जांच नहीं करते। लोगों का कहना है कि जब तक काम की गुणवत्ता की निगरानी नहीं होगी। मैंने अपने कार्यकाल में समस्याओं के समाधान का प्रयास किया है। नाली, पानी, पेंशन और अन्य योजनाओं में लोगों की मदद की गई है। नगर निगम चुनाव नहीं होने और सीमित संसाधनों के कारण कुछ काम लंबित हैं। इसके बावजूद जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का लगातार प्रयास जारी है। - मोना देवी, वार्ड पार्षद वार्ड में वार्ड में कई काम अधूरे हैं, कई बुनियादी समस्याएं आज भी बनी हुई हैं। नाली, सड़क, स्ट्रीट लाइट और सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। आबादी अधिक होने के बावजूद सुविधाएं कम हैं। अगर समय पर योजनाएं लागू होतीं और निगरानी होती, तो वार्ड की स्थिति कहीं बेहतर हो सकती थी। -मनोज नारायण भगत, निकटतम प्रतिद्वंद्वी हमारे मोहल्ले में नाली पूरी तरह ढकी हुई है, जिससे सफाई नहीं हो पाती। घर का गंदा पानी और कचरा अंदर ही जमा रहता है। -शिवम अग्रवाल डस्टबिन नहीं होने से सड़क पर ही कचरा फेंक देते हैं। कुत्ते और गाय उसे फैला देते हैं। सुबह उठते ही हर तरफ गंदगी दिखाई देती है। -कृष्णा प्रसाद शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। स्ट्रीट लाइट सालों से खराब पड़ी है। रात में चलना डरावना लगता है। -नरेश प्रसाद नाली से बदबू आती है कि घर में बैठना मुश्किल हो जाता है। बरसात में हालत और खराब हो जाती है। कई बार शिकायत की गई। -दिनेश नाटानी वार्ड में फॉगिंग कभी होती ही नहीं। फॉगिंग कब और कैसे होती है। मच्छर और मक्खियों की वजह से लोग अक्सर बीमार पड़ रहे हैं। -पीयूष कुमार गुप्ता कई चापानल खराब पड़े हैं। गर्मी में पीने के पानी के लिए काफी परेशानी होती है। बार-बार कहने के बावजूद अभी तक मरम्मत नहीं कराई गई है। -रतन कुमार गुप्ता सड़क पर पेवर ब्लॉक आधा ही लगाया गया है। कहीं एक तरफ है तो कहीं दूसरी तरफ। इससे चलने में परेशानी होती है। -नवीन कुमार ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चले जाते हैं। नगर निगम के लोग सिर्फ कागजों में काम पूरा दिखा देते हैं। फील्ड में कोई देखने नहीं आता। -अनिकेत कुमार पोल पर पुराने तारों का जाल बना हुआ है। कभी भी हादसा हो सकता है। बच्चों को देखकर डर लगता है कि कहीं कोई नुकसान न हो जाए। -गोपाल लाल गुप्ता नगर निगम सिर्फ टैक्स लेने आती है, सुविधा देने कोई नहीं आता। सफाई, पानी और रोशनी जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। -गुड्डू बाबा सफाई के लिए मशीनें लाई गई थीं, कुछ ही महीनों में खराब हो गईं। मशीनें आईं जरूर, लेकिन काम के नाम पर कुछ खास नहीं हुआ। -अभिषेक कुमार नगर निगम गंभीरता से काम करे। अगर नाली, सड़क, लाइट और सफाई ठीक हो जाए तो इस इलाके में रहना आसान हो सकता है। -नंद किशोर भगत

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